बगहा. वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध की जयंती मधुबनी प्रखंड के तमकुहा और बांसी स्थित बौद्ध बिहार में मनाई गयी. ईसा से 563 वर्ष राज परिवार में पैदा हुए थे. इनका नाम सिद्धार्थ रखा गया था. बाद में बिहार के गया में एक पीपल वृक्ष के नीचे ध्यान मुद्रा में बैठे सिद्धार्थ को ज्ञान की प्राप्ति हुई. तब उनका नाम बुद्ध पड़ गया. विश्व शांति का संदेश देने वाले इस महान पुरुष के प्रकटोत्सव पर उन्हें सादर नमन है. उक्त बातें सारण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी प्रतिनिधि योगेंद्र सिंह ने कही. उन्होंने कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के बाद वे अपने प्रचारकों एवं समर्थकों के लिए भगवान बन गए. भगवान बुद्ध ने अपने जीवन काल में कई ऐसे हृदय परिवर्तन कराए. डाकू रत्नाकर को हृदय परिवर्तन कराकर महर्षि वाल्मीकि बनाना. आज भी प्रासंगिक है कि भगवान बुद्ध का जीवन हर किसी के लिए प्रेरणादायक है. उनके जीवन दर्शन से हमें प्रेम, शांति, सद्भाव, त्याग, अहिंसा एवं संयम जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है. वही जदयू के प्रखंड सचिव राजन भारती ने बताया कि भगवान बुद्ध का जीवन हम सभी के लिए आदर्श है. भगवान बुद्ध के बताए हुए अष्टांगिक मार्ग पर चलकर मनुष्य सम्यक और संतुलित जीवन यापन करने में सक्षम हो सकता है. मौके पर तुलसी रजन राम, बीपी सिंह यादव, कमलेश यादव, हरेंद्र सिंह, वकील भारती, मनोज राम, रामाशीष राम, बृजेश भारती आदि मौजूद रहे.
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