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पर्यावरण- पृथ्वी की सुरक्षा में ही मानव जीवन की सुरक्षा

Updated at : 13 May 2024 7:22 PM (IST)
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पर्यावरण- पृथ्वी की सुरक्षा में ही मानव जीवन की सुरक्षा

गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बगहा में पर्यावरण पर जनाधिक्य एवं गरीबी का प्रभाव विषयक राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन रविवार की शाम संपन्न हुआ. संगोष्ठी की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो (डॉ ) रवींद्र कुमार चौधरी ने की.

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बेतिया. गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बगहा में पर्यावरण पर जनाधिक्य एवं गरीबी का प्रभाव विषयक राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन रविवार की शाम संपन्न हुआ. संगोष्ठी की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो (डॉ ) रवींद्र कुमार चौधरी ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो चौधरी ने देश में बढ़ती जनसंख्या और गरीबी के बीच जीवन यापन के सिमटते संसाधनों की स्थिति बड़ी चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण व पृथ्वी की स्वास्थ्य की सुरक्षा में ही मानव जीवन की सुरक्षा अंतर्निहित है. जनसंख्या व गरीबी को दूर करने के लिए हमारी योजनाएं तो जरूर बनतीं हैं किंतु धरातल पर उसका क्रियान्वयन शिथिल हो जाता है. इसके लिए प्रत्येक नागरिक को गंभीर होने की ज़रूरत है. गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी छत्तीसगढ़ की प्रो. (डॉ)गरिमा तिवारी ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ्य जीवन की कुंजी है, आज तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या के कारण प्राकृतिक संसाधनों का विदोहन हो रहा है. अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉ मोहम्मद फिरोज अहमद ने जनाधिक्य, अनुकूलतम जनसंख्या तथा अल्प जनसंख्या को परिभाषित करते हुए बताया की किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए ””””””””ऑप्टिमम पापुलेशन ”””””””” निहायत ही ज़रूरी है. डॉ. नेहा चौधरी ने कहा कि वैश्विक पर्यावरणीय संकट के लिए जनसंख्या विस्फोट एवं उपभोक्तावादी जीवन शैली उत्तरदायी हैं.कार्यक्रम के संयोजक और कॉलेज के भूगोल विभाग में सहायक प्राध्यापक नेहाल अहमद ने कहा कि देश में ग़रीबी उन्मूलन के लिए जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाना अति आवश्यक है. आज जहां विश्व की आबादी 8.11 अरब के आंकड़ों को पार कर चुकी है. वहीं भारत की जनसंख्या एक अरब 44 करोड़ हो चुकी है जो विश्व में सर्वाधिक है. आयोजन सचिव डॉ रेखा श्रीवास्तव ने अपने स्वागत भाषण व मंच संचालन के क्रम में पर्यावरण के महत्व को रेखांकित किया.इस अवसर पर राजन तिवारी, धर्मेन्द्र कुमार, सादिया, सायेक़ा, नौशाद, राहुल गुड़िया, निभा, सौम्या, मारूफ, निशा, सोनू कुमार जर्नलिस्ट के अलावे सैकड़ों विद्यार्थियों की भी रचनात्मक सहभागिता रही.

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