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ब्रिटिश कालीन तांबा पाइप वाले बोरिंग से एमजेके कॉलेज में फिर होगी पेयजल आपूर्ति

Updated at : 29 Jun 2024 9:01 PM (IST)
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ब्रिटिश कालीन तांबा पाइप वाले बोरिंग से एमजेके कॉलेज में फिर होगी पेयजल आपूर्ति

महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय परिसर में मौजूद 500 फीट गहराई वाले तांबे के बोरिंग को एक बार फिर पेयजल आपूर्ति शुरू होगी.

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बेतिया. महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय परिसर में मौजूद 500 फीट गहराई वाले तांबे के बोरिंग को एक बार फिर पेयजल आपूर्ति शुरू होगी. करीब 100 साल से भी अधिक पुराने बेतिया राज कालीन इस धरोहर जीवंत करने की शुरुआती कवायद शनिवार को सफल रहने पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो.(डॉ) रवींद्र कुमार चौधरी ने उपरोक्त जानकारी देने के साथ यह भी बताया कि कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य प्रो.आरएन राय के द्वारा 2006 में इसको शुरू कराया गया था. लेकिन 2008 में ही उसके मोटर को चोर चुरा ले गए. तबके बाद किसी अन्य प्राचार्य का इसके तरफ ध्यान नहीं गया. फल स्वरूप पिछले 16 साल से बेतिया राज कालीन यह धरोहर बंद और अनुपयोगी बना है. प्राचार्य प्रो.(डॉ) रवींद्र कुमार चौधरी ने बताया कि कॉलेज परिसर के पूर्व उत्तर मैदान में बेतिया राज के तत्कालीन मैनेजर के बंगले के लिए 1936 के दशक में यह 500 फीट गहराई वाला ताबां पाइप का बोरिंग गाड़े जाने की चर्चा दशकों से होती रही है. प्राचार्य ने बताया कि करीब एक माह पूर्व अपने योगदान के साथ ही इस दुर्लभ धरोहर पुनः उपयोगी बनाने का कार्य मैंने शुरू कर दिया था. बोरिंग की सफाई के दौरान पता चला कि भूतल से करीब तीन फीट अंदर तक का तांबे का पाइप गायब है. जानकर कारीगरों की राय से उक्त तीन फीट गायब तांबे की पाइप की जगह उच्च कोटि वाली लोहे की पाइप के सहारे चापाकाल को बोरिंग से जोड़ कर आज पानी की आपूर्ति प्रारंभ कर दी है. बहुत जल्दी ही तांबे के पाइप से बने इस ब्रिटिश और बेतिया राज कालीन इस विरासत सदृश्य बोरिंग को एक बार फिर से चालू किया जाएगा.प्राचार्य प्रो. कुमार चौधरी ने बताया कि बेतिया राज मैनेजर के पूर्ववर्ती बंगला भवन और परिसर में स्थापित होकर 1956 से अब तक संचालित है में पहले से अंग्रेजों के जमाने की एक तांबे का बोरिंग है. जो वर्षों से बंद पड़ा हुआ है. उसे फिर से शुरू करने की योजना तैयार कर ली गई है. काफी गहराई युक्त इस तांबे के बोरिंग से निकलने वाला पानी काफी शुद्ध माना जाता है. इस कारण इसे फिर से शुरू कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि वह चाहते हैं कि इस बोरिंग के पानी का लाभ महाविद्यालय में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं के साथ नगरवासियों को भी मिले. इसलिए इस बोरिंग में मोटर लगाकर एक वॉटर टावर बनाने की योजना बनाई गई है. वॉटर टावर बनाकर इसमें नल लगा दिया जाएगा. जिससे निकलने वाले पानी को छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक और नगरवासी भी सकेंगे. प्राचार्य ने बताया कि वर्ष 2008 तक यह बोरिंग चल रहा था. इसमें काफी गहराई तक तांबे का पाइप लगाया गया है. जिससे की शुद्ध पानी निकलता है. बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की स्थानीय शाखा उठाएगी बोरिंग को पुन:उपयोगी बनाने का खर्च

बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की स्थानीय शाखा बोरिंग को पुन:उपयोगी बनाने का पूरा खर्च उठाएगी. स्थानीय शाखा प्रबंधक विकास कुमार शुक्ला ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि हमारे राष्ट्रीयकृत बैंक की स्थानीय शाखा अपने सामाजिक दायित्व का निर्हवहन करते हुए यह कार्य पूरा करेगी.इस घोषणा का स्वागत करते हुए प्राचार्य प्रो.(डॉ) रवींद्र कुमार चौधरी ने बताया कि शाखा प्रबंधक श्री शुक्ला भी इसी गौरवशाली महाविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं. उनकी इस घोषणा का कॉलेज प्रशासन स्वागत करता है.

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