नरकटियागंज अस्पताल में बढ़ा विवाद, आशा कार्यकर्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना शुरू

धरना पर बैठी आशा
नरकटियागंज अनुमंडलीय अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं और महिला सुरक्षा गार्ड के बीच विवाद ने आंदोलन का रूप ले लिया है. बिहार राज्य आशा संघ के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है, जिसमें वे महिला सुरक्षा गार्डों को हटाने और अपने खिलाफ दर्ज मामला वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
Asha Workers Protest: नरकटियागंज अनुमंडलीय अस्पताल में आशा कार्यकर्ता और महिला सुरक्षा गार्ड के बीच हुए विवाद ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है. बिहार राज्य आशा संघ (एटक) के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार से अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया.
धरने के दौरान कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की.
दो मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन
धरना दे रहे आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें हैं कि अस्पताल में तैनात महिला सुरक्षा गार्डों को हटाया जाए और आशा कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामला वापस लिया जाए.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा.
आशा संघ ने लगाए ये आरोप
धरना को संबोधित करते हुए बिहार राज्य आशा संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ओम प्रकाश क्रांति, एटक नेता फिरोज भारती, आशा नेत्री रंजना, सुंदरम मिश्रा, चंदा देवी, मीना देवी, बिंदु मिश्रा समेत अन्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि 25 जुलाई को अस्पताल परिसर में एक सुरक्षा गार्ड ने आशा कार्यकर्ता और उसके साथ आई गर्भवती महिला के साथ मारपीट की.
उनका दावा है कि घटना में गर्भवती महिला को चोट लगी और आशा कार्यकर्ता के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया.
आशा कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ शिकारपुर थाने में झूठा मामला दर्ज करा दिया.
'झूठे आरोप लगाए गए'
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन पर सोने का लॉकेट और पांच हजार रुपये छीनने का झूठा आरोप लगाया गया है.
उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए.
पहले भी कर चुके हैं शिकायत
इससे पहले 29 जुलाई को आशा कार्यकर्ताओं ने शिकारपुर थाना पहुंचकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी.
साथ ही जिलाधिकारी, अस्पताल उपाधीक्षक और सिविल सर्जन को भी लिखित आवेदन देकर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और समाधान कराने की मांग की गई थी.
सुरक्षा गार्ड ने आरोपों को बताया गलत
वहीं, अस्पताल में तैनात महिला सुरक्षा गार्ड अंशु देवी ने आशा कार्यकर्ताओं के आरोपों को खारिज किया है.
उनका कहना है कि अस्पताल में मरीजों को कतार के अनुसार भेजा जा रहा था. इसी दौरान एक आशा कार्यकर्ता कतार तोड़कर मरीज को अंदर ले जाने लगी. रोकने पर आशा कार्यकर्ता ने उनके साथ मारपीट की.
गार्ड ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उनका सोने का लॉकेट भी छीन लिया गया.
जांच और समाधान पर टिकी नजर
फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं. मामले में पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई का इंतजार है. जांच के बाद ही पूरे विवाद की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
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लेखक के बारे में
By सतीश कुमार पांडेय
सतीश कुमार पांडेय ने वर्ष 2000 में जी न्यूज से पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने चर्चित दस्यु सरगनाओं की रिपोर्टिंग की. बाद में आज और दैनिक जागरण में कार्य किया. वर्ष 2016 से वें प्रभात खबर में कार्यरत हैं. इन्हें क्राइम, प्रशासनिक, राजनीतिक, सामाजिक तथा खेती-किसानी से जुड़ी खबरों में विशेष रुचि रही है.
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