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बगहा- शास्त्रीनगर–बेलवनिया उत्तर प्रदेश सड़क पुल निर्माण को लेकर सर्वदलीय बैठक, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

Updated at : 22 Jan 2026 5:50 PM (IST)
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बगहा- शास्त्रीनगर–बेलवनिया उत्तर प्रदेश सड़क पुल निर्माण को लेकर सर्वदलीय बैठक, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

शास्त्रीनगर–बेलवनिया उत्तर प्रदेश सड़क पुल निर्माण को लेकर जारी घमासान के बीच गुरुवार को शास्त्री नगर में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई.

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बगहा. शास्त्रीनगर–बेलवनिया उत्तर प्रदेश सड़क पुल निर्माण को लेकर जारी घमासान के बीच गुरुवार को शास्त्री नगर में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता पूर्व सभापति प्रतिनिधि सह अधिवक्ता फिरोज आलम तथा संचालन राकेश सिंह ने की. इसमें पक्ष और विपक्ष के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहें. बैठक में सर्वसम्मति से पुल निर्माण को बगहा शहर और आसपास के इलाकों के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया. वक्ताओं ने कहा कि शास्त्रीनगर–बेलवनिया पुल केवल एक संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ है. पुल के अभाव में लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. खासकर किसानों, छात्रों, मरीजों और व्यापारियों को रोजमर्रा की आवाजाही में कठिनाइयों से जूझना पड़ता है. एक स्वर में कहा कि पुल निर्माण का मुद्दा हर स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि पुल निर्माण का मुद्दा हर स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा. जनप्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि वे इस मांग को संबंधित विभागों, सरकार और उच्च मंचों तक पहुंचाकर शीघ्र समाधान की दिशा में पहल करेंगे. वक्ताओं ने यह भी कहा कि वर्षों से लंबित इस परियोजना को अब और टालना जनहित के खिलाफ होगा. पिछले आठ वर्षों से पुल निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष समिति वहीं,अजय साहनी कहा कि पिछले आठ वर्षों से पुल निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष कर रही शास्त्रीनगर–बेलवनिया पुल निर्माण संघर्ष समिति के सदस्यों ने बैठक में कड़ा रुख अपनाया. समिति के प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा. यदि जल्द ही पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि पुल निर्माण को नजरअंदाज करने वाले जनप्रतिनिधियों और दलों को आगामी चुनाव में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. प्रशासन से मांग की कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए पुल निर्माण को प्राथमिकता बैठक में मौजूद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन से मांग की कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए पुल निर्माण को प्राथमिकता दी जाए. लोगों का कहना था कि वर्षों से लंबित इस मांग के कारण क्षेत्र का विकास बाधित हो रहा है.अंत में अध्यक्षता कर रहे फिरोज आलम ने कहा कि सर्वदलीय एकजुटता इस बात का संकेत है कि पुल निर्माण अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि जनआंदोलन बन चुका है. उन्होंने प्रशासन से शीघ्र ठोस कार्रवाई की अपील की.उपस्थिति फ़िरोज़ आलम संचालन राकेश सिंह जयनेन्द्र सिंह,संदीप चौधरी उर्फ गोलू, अमरेशवर सिंह, कामरान अज़ीज, हृदयानन्द दूबे, नागेंद्र सहनी, दयाशंकर सिंह, गिरिन्द्र पाण्डेय, अरविन्द नाथ तिवारी, सुबोध चौहान, अजय साहनी, विशाल पाण्डेय, कामेश्वर तिवारी, जुगनू आलम, विनय यादव, सुशील दूबे, रामाशंकर दूबे, उमेश गुप्ता, निवेदिता मिश्रा, बबलू यादव, श्रेयांशु कुमार, शैलेश जदुवंशी, प्रमोद रौनियार, अनिल सहनी, मो0 राशिद, छोटे श्रीवास्तव, अशोक कुमार मिश्रा, दीपू जायसवाल, हिमांशु जायसवाल, शांति देवी,राजेश प्रसाद, माधुरी देवी आदि शामिल रहें अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा ज्ञापन अनुमंडल बगहा, बगहा के शास्त्री नगर से उत्तर प्रदेश के बेलवनिया तक प्रस्तावित पुल के निरस्तीकरण के संबंध में ज्ञापन. कहना है कि पूर्व में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बाहर से होकर मदनपुर–पनियहवा के वैकल्पिक मार्ग के रूप में बगहा के शास्त्री नगर से उत्तर प्रदेश के बेलवनिया पुल तक प्रस्तावित पुल को निरस्त किए जाने से क्षेत्र के आम नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है. इस निर्णय के विरोध में आम जनता प्रतिदिन धरना–प्रदर्शन कर रही है.उक्त पुल के निर्माण से बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता. यह पुल दोनों राज्यों के बीच एक लाइफ लाइन के रूप में कार्य करता और मेरे संसदीय क्षेत्र के पिपरासी प्रखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र-जटहा, खड्डा, छितौनी, पनियहवा, नेबुआ, कप्तानगंज होते हुए गोरखपुर से बगहा अनुमंडल मुख्यालय तथा भविष्य के जिला मुख्यालय को जोड़ता. विदित हो कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में STMC की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण मदनपुर–पनियहवा सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है. भविष्य में यदि यह मार्ग वन विभाग द्वारा बंद कर दिया जाता है, तो बाल्मीकिनगर,हरनाटांड़, सेमरा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों एवं बगहा नगर के लाखों नागरिकों को पिपरासी प्रखंड व उत्तर प्रदेश के विभिन्न भागों में आवागमन हेतु 50 किलोमीटर से अधिक की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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