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नवीकरणीय ऊर्जा हब के रूप में पश्चिम चंपारण को नई पहचान दिलाएगा कुमारबाग में 50 करोड़ से स्थापित बायोगैस प्लांट

Updated at : 20 Jan 2026 6:37 PM (IST)
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नवीकरणीय ऊर्जा हब के रूप में पश्चिम चंपारण को नई पहचान दिलाएगा कुमारबाग में 50 करोड़ से स्थापित बायोगैस प्लांट

पश्चिम चंपारण जिले के कुमारबाग में करीब 50 करोड़ की लागत से स्थापित अत्याधुनिक बायोगैस प्लांट न केवल जिले बल्कि पूरे बिहार को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाला है.

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रवि ””रंक””, बेतिया पश्चिम चंपारण जिले के कुमारबाग में करीब 50 करोड़ की लागत से स्थापित अत्याधुनिक बायोगैस प्लांट न केवल जिले बल्कि पूरे बिहार को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाला है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते 16 जनवरी को अपनी महत्वाकांक्षी “समृद्धि यात्रा” की शुरुआत करते हुए इस परियोजना परियोजना के साथ करते हुए इसे राज्य की हरित विकास नीति का महत्वपूर्ण आधार बताया था.अपनी तरह के बिहार के इस पहले ऐसा बड़े बायोगैस उद्यम है, जिसकी दैनिक उत्पादन क्षमता 18 हजार घन मीटर है. इसकी जानकारी साझा करते हुए इस वर्धन बायो गैस प्लांट के परियोजना निदेशक अनंत कुमार के बताया कि 23 जनवरी से ही प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा. प्रतिदिन करीब 45 से 50 लाख रुपये मूल्य के 18 हजार घन मीटर बायोगैस उत्पादन क्षमता वाला यह उद्यम उत्पादन करना शुरू कर देगा.उन्होंने बताया कि राज्य को बायोगैस ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में हमारा यह प्रतिष्ठान बड़ी भूमिका और भागीदारी निभाएगा. “सस्टेनेबल एनर्जी एंड क्रॉप ” के विषय में आयरलैंड से एमटेक की पढ़ाई करने वाले परियोजना निदेशक अनंत कुमार ने बताया कि बिहार सरकार की “आत्मनिर्भर बिहार” परिकल्पना के अनुरूप यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन का भी मजबूत माध्यम बनेगी.प्लांट के संचालन में चीनी या गुड़ बनाने के वेस्ट छोवा, प्रेसमड,गोबर के अलावा धान, मक्का, सरसों यथा ऐसे अन्य कृषि उत्पादों के वेस्ट मैटेरियल का कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाएगा. जिसकी आपूर्ति, परिवहन और अन्य सहायक गतिविधियों के जरिए करीब 300 परिवारों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है.इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. उत्पादन को पूरी क्षमता में ले जाने के लिए 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है. वही जिला उद्योग के महाप्रबंधक रोहित राज ने बताया कि हमारे जिला में उत्पादित बायोगैस ईंधन के रूप में सीएनजी की तुलना में अधिक सस्ती और पर्यावरण संरक्षा के लिए भी अनुकूल होगा.फिलहाल इस बायोगैस की बिक्री दोनों चंपारण जिलों के साथ-साथ गोपालगंज जिले के सीएनजी स्टेशनों के माध्यम से होने की योजना है. इससे वाहनों के लिए स्वच्छ और किफायती ईंधन उपलब्ध होगा. अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर ऊर्जा विशेषज्ञों के हवाले से जिला उद्योग के महाप्रबंधक रोहित राज ने बताया कि कुमारबाग का यह बायोगैस प्लांट पश्चिम चंपारण को नवीकरणीय ऊर्जा हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम है. यह परियोजना न सिर्फ प्रदूषण कम करेगी, बल्कि सतत विकास और हरित अर्थव्यवस्था के मॉडल के रूप में भी अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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