ePaper

Begusarai News : जिले में प्रतिबंध के बावजूद सिंगल यूज्ड प्लास्टिक का उपयोग

Updated at : 09 Nov 2025 10:12 PM (IST)
विज्ञापन
Begusarai News : जिले में प्रतिबंध के बावजूद सिंगल यूज्ड प्लास्टिक का उपयोग

केंद्र और बिहार सरकार द्वारा सिंगल यूज्ड प्लास्टिक पर रोक लगाने के बावजूद जिले में इसका उपयोग आम लोगों और दुकानदारों द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है.

विज्ञापन

बेगूसराय. केंद्र और बिहार सरकार द्वारा सिंगल यूज्ड प्लास्टिक पर रोक लगाने के बावजूद जिले में इसका उपयोग आम लोगों और दुकानदारों द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है. पॉलीथिन और 100 माइक्रोन से कम पतले प्लास्टिक बैग के उपयोग पर कानूनन 500 से 2000 रुपये तक का जुर्माना तय है, लेकिन इसका पालन कम ही देखने को मिलता है. दुकानदार और ग्राहक दोनों इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है. चालू वर्ष में नगर निगम प्रशासन ने केवल 30 दिन ही छापामारी अभियान चलाया है. इन अभियानों के दौरान प्रतिबंधित प्लास्टिक विक्रेताओं से 70,400 रुपये जुर्माना वसूल किया गया और मात्र 40 किलो सिंगल यूज्ड प्लास्टिक जब्त किया गया. यह संख्या संकेत देती है कि प्रशासनिक प्रयासों की कमी के कारण नियम कागजों तक ही सीमित रह गये हैं. लगातार और व्यापक अभियान न चलने से दुकानदार और ग्राहक कानून का उल्लंघन सहजता से कर रहे हैं.

स्वास्थ्य के लिए खतरनाक

डॉ मनीष कुमार के अनुसार सिंगल यूज्ड प्लास्टिक न केवल मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित करता है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है. इसमें मौजूद टॉक्सिक तत्व जैसे लेड, सीसा, मरकरी और कैडमियम गंभीर रोग उत्पन्न कर सकते हैं. प्लास्टिक के संपर्क में आने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, और इससे जन्मजात विकार या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. प्लास्टिक का प्रभाव सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में मानव जीवन पर पड़ता है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में जागरूकता की कमी और प्रशासनिक ढिलाई के कारण प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ रहा है. अक्सर केवल बीच-बीच में अभियान चलाकर नियमों का पालन कराया जाता है, लेकिन निरंतरता नहीं होती. इसके परिणामस्वरूप दुकानदार और ग्राहक दोनों सिंगल यूज्ड प्लास्टिक का उपयोग जारी रखते हैं.

इन विकल्पों का हो सकता है उपयोग

प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए विशेषज्ञ जूट, स्टील, कांच, बांस, मिट्टी और चीनी मिट्टी की वस्तुएं जैसे विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं. इसके अलावा बायोप्लास्टिक का उपयोग भी किया जा सकता है, जो प्राकृतिक संसाधनों जैसे वनस्पति तेल और स्टार्च से बनाया जाता है और पर्यावरण के अनुकूल है. स्थानीय प्रशासन और समाज को मिलकर निरंतर अभियान चलाना और लोगों में जागरुकता बढ़ाना आवश्यक है. दुकानदारों को प्रशिक्षण और ग्राहक को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए. केवल इस तरह ही सिंगल यूज्ड प्लास्टिक के उपयोग को नियंत्रित किया जा सकता है और पर्यावरण और स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है. जिले में यदि प्रशासन और जनता सहयोग करें, तो प्लास्टिक प्रदूषण पर अंकुश लगाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए नियमित निगरानी, सख्त कानून पालन और सामाजिक जागरूकता अनिवार्य है तभी सिंगल यूज्ड प्लास्टिक पर रोक का उद्देश्य सफल हो सकेगा और शहर व ग्रामीण क्षेत्र दोनों में स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SHAH ABID HUSSAIN

लेखक के बारे में

By SHAH ABID HUSSAIN

SHAH ABID HUSSAIN is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन