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तेघड़ा के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले की तैयारी अंतिम चरण में

Updated at : 13 Aug 2025 9:03 PM (IST)
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तेघड़ा के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले की तैयारी अंतिम चरण में

बेगूसराय एशिया का वृंदवान गोकुल के बाद दूसरा सबसे बड़ा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला है. जिसमें अलग-अलग मंडपों में बांके बिहारी के जन्मोत्सव के अलग-अलग प्रतिमा, राधा प्रेम और नटखट गोपाल की झांकियां आकर्षण का केंद्र होती है.

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तेघड़ा. बेगूसराय एशिया का वृंदवान गोकुल के बाद दूसरा सबसे बड़ा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला है. जिसमें अलग-अलग मंडपों में बांके बिहारी के जन्मोत्सव के अलग-अलग प्रतिमा, राधा प्रेम और नटखट गोपाल की झांकियां आकर्षण का केंद्र होती है. अद्भुत छटा बिखेरती एक से बढ़कर एक मंडपों में अलग अलग स्वरूप में प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है. सभी गगनचुंबी मंडपों की सजावट भी ऐसी की जिससे नजर हटा पना मुश्किल होता है और नजरे मंडप की खुबसुरत को निहारते निहारते थक जाए पर हटाए हटे नहीं. श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला तेघड़ा और बरौनी में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस समय पूरा तेघड़ा कृष्ण और राधा भक्ति से सराबोर है. व्यवसायी से लेकर ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं कारीगर सभी भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं झांकी और मंडपों को आकर्षक स्वरूप देनें में लगे हैं. 2025 में 98 वां वर्ष में प्रवेश कर रहा है तेघड़ा का ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला. मेला की तैयारियां अंतिम दौर में है और तेघड़ा मथुरा वृंदावन की छटा बिखेरने को आतुर है. अनुमंडल प्रशासन सभी पूजा समिति को सुरक्षा एवं सुविधा को लेकर भरपूर सहयोग करने को प्रतिबद्ध है. बताते चलें कि तेघड़ा और बरौनी में 16 अगस्त से 20 अगस्त तक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेले का आयोजन होगा. 21 अगस्त को प्रतिमा विसर्जन किया जाना है. तेघड़ा के लगभग 08 किलोमीटर के क्षेत्र में मनाये जाने वाला मेला परिसर जय कन्हैया लाल की लड्डु गोपाल की जयकारों से गुंजायमान है. जानकारों के मुताबिक श्रीकृष्ण की भक्ति में इस क्षेत्र के लोग ऐसे डुबे की 1928 ई में एक पूजा पंडाल से शुरू होने वाला कृष्ण जन्मोत्सव मेला वर्तमान में 15 विशाल आकर्षक पंडाल में पूरे उत्साह के साथ श्रद्धाभाव से मनाया जाता है. और मेला इतने दुर क्षेत्रफल में फैला होता है कि किसी भी श्रद्धालु के लिए एक दिन में पूरा मेला परिसर घूम लेना संभव नहीं हो पाता है. मेला देखने को बेगूसराय जिला नहीं बल्कि आसपास जिलों के साथ दुसरे प्रदेश के लोग भी यहां पहुंचते है. श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला को देखने के लिए तेघड़ा आसपास क्षेत्र के वैसे लोग जो रोजगार या नौकरी के लिए बाहर हैं या फिर सरकारी नौकरी में दुसरे परदेश में हैं छुट्टी लेकर मेला का आनंद उठाने आता हैं. जानकारों के मुताबिक तेघड़ा के इस ऐतिहासिक मेला के पीछे प्लेग महामारी से मुक्ति को बताया जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MANISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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