बेगूसराय में 4 हजार से अधिक औषधीय पौधों का संग्रह, हर पौधे पर QR कोड से मिलेगी पूरी जानकारी
बेगूसराय आयुर्वेद कॉलेज में लगाई गई औषधीय पौधे
बेगूसराय के राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय ने औषधीय पौधों की पहचान को आसान बना दिया है. यहां 350 से अधिक प्रजातियों के 4000 से अधिक पौधों पर QR कोड लगे हैं, जिन्हें स्कैन करते ही उनकी पूरी जानकारी मोबाइल पर मिल जाती है. यह पहल आयुर्वेद के छात्रों और आम लोगों के लिए ज्ञान का खजाना है.
Begusarai Medicinal Garden QR Code: अगर किसी औषधीय पौधे को देखकर उसके बारे में जानना हो तो अब किताबों के पन्ने पलटने की जरूरत नहीं है. बेगूसराय के राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय का औषधीय उद्यान इस मामले में खास है. यहां मौजूद पौधों के पास लगे क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करते ही संबंधित पौधे की जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती है. पौधे का नाम, उसके औषधीय गुण, किन रोगों में इसका उपयोग किया जाता है और उससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एक क्लिक में सामने आ जाती हैं.
करीब 350 प्रजातियों के 4 हजार से अधिक पौधे
महाविद्यालय परिसर में विकसित इस औषधीय उद्यान में करीब 350 अलग-अलग प्रजातियों के 4 हजार से अधिक औषधीय पौधे मौजूद हैं. देश के विभिन्न हिस्सों से इन पौधों का संकलन कर एक ही परिसर में संरक्षित किया गया है. यही वजह है कि यह उद्यान आयुर्वेद की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए किसी खुली प्रयोगशाला से कम नहीं है. विद्यार्थी किताबों में पढ़े गए औषधीय पौधों को प्रत्यक्ष रूप से देखकर उनके स्वरूप, पहचान और उपयोग को समझ सकते हैं.
हर पौधे पर लगा है क्यूआर कोड
उद्यान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिजिटल व्यवस्था है. प्रत्येक पौधे के पास क्यूआर कोड लगाया गया है. मोबाइल कैमरे से कोड स्कैन करते ही पौधे की पहचान और उससे संबंधित जानकारी स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती है. इससे किसी अनजान पौधे की पहचान करना आसान हो गया है. खासकर विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए यह व्यवस्था अध्ययन को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाती है.
देश के अलग-अलग हिस्सों से किया गया पौधों का संकलन
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. राम नंदन साहनी ने बताया कि महाविद्यालय परिसर में वर्तमान में लगभग 350 विभिन्न प्रजातियों के 4 हजार औषधीय पौधे हैं. इनका संकलन देश के अलग-अलग क्षेत्रों से किया गया है. उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न औषधीय वनस्पतियों का अध्ययन एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है.
बीएएमएस विद्यार्थियों को मिलती है व्यावहारिक जानकारी
डॉ. साहनी ने बताया कि बीएएमएस द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में मेडिसिनल प्लांट का अध्ययन शामिल है. इसी उद्देश्य से औषधीय उद्यान को विकसित किया गया है. विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहना पड़े, इसके लिए उन्हें पौधों के बीच ले जाकर उनके बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जाती है. इससे पौधों की पहचान, उनके औषधीय महत्व और उपयोग को समझने में काफी मदद मिलती है.
आम लोग और शोधकर्ता भी ले सकते हैं जानकारी
यह उद्यान सिर्फ आयुर्वेद के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है. आयुर्वेद और औषधीय पौधों में रुचि रखने वाले आम लोग भी यहां पौधों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. क्यूआर कोड की डिजिटल सुविधा के कारण पौधे की पहचान और उसके औषधीय महत्व को समझना और आसान हो गया है. शोधकर्ताओं के लिए भी यहां मौजूद विभिन्न प्रजातियों का संग्रह अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है.
आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का मेल
बेगूसराय का यह औषधीय उद्यान पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का उदाहरण पेश कर रहा है. एक ओर परिसर में सैकड़ों प्रजातियों के हजारों औषधीय पौधों को संरक्षित किया गया है, वहीं दूसरी ओर प्रत्येक पौधे की जानकारी डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है.
एक ही परिसर में इतने बड़े पैमाने पर औषधीय पौधों का संग्रह और प्रत्येक पौधे के साथ क्यूआर कोड की सुविधा इसे खास बनाती है. महाविद्यालय की ओर से इसे देश के अनोखे आयुर्वेदिक उद्यानों में से एक बताया जा रहा है. आने वाले समय में यह उद्यान आयुर्वेद शिक्षा, शोध और औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण के लिहाज से बेगूसराय की एक अलग पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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