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युवाओं का भविष्य बिगाड़ रहा नशे की लत, हो रहे मानसिक बीमारियों के शिकार

Updated at : 23 Nov 2025 10:00 PM (IST)
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युवाओं का भविष्य बिगाड़ रहा नशे की लत, हो रहे मानसिक बीमारियों के शिकार

फुलवड़िया थाना क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में इन दिनों सूखा नशा का कारोबार खूब फल-फूल रहा है. इसका सबसे बड़ा शिकार वह युवा पीढ़ी हो रही है, जो देश का भविष्य संवारने वाली थी.

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बरौनी. फुलवड़िया थाना क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में इन दिनों सूखा नशा का कारोबार खूब फल-फूल रहा है. इसका सबसे बड़ा शिकार वह युवा पीढ़ी हो रही है, जो देश का भविष्य संवारने वाली थी. युवा प्रतिबंधित नशा सामग्री का उपयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं, जिसके कारण वे मानसिक रूप से बीमार होकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं. जानकारों के मुताबिक, इस नशा कारोबार से जुड़े लोग भी युवा ही हैं और इनका सिंडिकेट इतना बड़ा और खतरनाक है कि लोग जानते हुए भी बोलने से डरते हैं. सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ लोगों का तो साफतौर पर कहना है कि स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से यह गोरखधंधा पूरे क्षेत्र में अपना पांव पसार चुका है.

स्कूली छात्र भी बन रहे शिकार

फुलवड़िया थानाक्षेत्र के दुलरूआ धाम पोखर, जगदंबा स्थान, गंजपर, और दीनदयाल रोड शाम होते ही नशापान के बाज़ार में तब्दील हो जाते हैं और ये जगहें सूखे नशे के कारोबार का गढ़ मानी जाती हैं. बेगूसराय के विभिन्न थाना क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों के 100 मीटर के दायरे के अंदर गुमटी खोलकर खुलेआम प्रतिबंधित नशीली पदार्थों की बिक्री की जा रही है, जिस पर स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है. स्थिति इतनी बदतर है कि नशे की लत अब कॉलेज के छात्रों की कौन कहे, स्कूली छात्रों में भी तेजी से पांव पसार रही है. छात्र अब पारंपरिक नशे (भांग, गांजा, अफीम, चरस) के अलावा कई खतरनाक पदार्थों का सेवन कर रहे हैं. जिसमें व्हाइटनर, थिनर, सैंफिक्स, बोनफिक्स, फोर्टविन इंजेक्शन, कोडिर्न युक्त कफ सिरप, और प्रतिबंधित ””कोटा”” नामक द्रव्य शामिल है. इन नशीली पदार्थों को शराब से भी ज्यादा नुकसानदायक माना गया है, और इसकी चपेट में सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे आ रहे हैं.

अपराध और स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम

सूखे नशे के आदी हो चुके युवक उसे प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा पहुंचते हैं. इससे सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ छिनतई, चोरी, छेड़छाड़, व्यभिचार जैसी अपराध की प्रवृत्तियाँ युवाओं में काफी तेजी से बढ़ रही हैं. जानकारों के मुताबिक, बिहार में शराबबंदी के बाद चरस, गांजा, भांग जैसे प्रतिबंधित नशे के साधनों में कोई गिरावट नहीं आई, बल्कि इनका सेवन करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है. सेवानिवृत्त सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार के अनुसार, इन नशीले पदार्थों के गंभीर परिणाम होते हैं. फोर्टविन और कफ सिरप से लोगों में कंफ्यूज होना, याददाश्त कमजोर होना, लिवर में गड़बड़ी और पेट व सीने में दर्द होता है. वहीं व्हाइटनर/सॉल्युशन सूंघने से निराशा, एनीमिया, पौरुष क्षमता प्रभावित होना और मानसिक संतुलन का बिगड़ता है. तंबाकू/गुटखा से मुंह और फेफड़े का कैंसर होता है.

अनुमंडल प्रशासन की कार्रवाई शुरू

प्रतिबंधित मादक नशीला पदार्थ की खरीद-बिक्री और सेवन पर नियंत्रण के लिए एसडीओ तेघड़ा राकेश कुमार ने कार्रवाई शुरू कर दी है और इसे रोकना प्रशासन की प्राथमिकता बताया है. 10 नवंबर सोमवार की देर रात फुलवड़िया थानाध्यक्ष विजय सहनी ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर कोल बोर्ड कॉलेज रोड स्थित शिवा होटल से दो धंधेबाज युवक को एक सौ ग्राम से अधिक मात्रा में प्रतिबंधित ””कोटा”” नामक द्रव्य के साथ गिरफ्तार किया था. इसके अलावा 12 नवंबर को एसडीओ तेघड़ा राकेश कुमार, डीएसपी कृष्ण कुमार एवं बरौनी नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी रणवीर कुमार ने फुलवड़िया थानाक्षेत्र के विभिन्न चौक-चौराहों और बाजारों में सूखा नशा के खिलाफ अभियान भी चलाया. स्थानीय लोगों ने इस कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए अनुमंडल प्रशासन से कड़ी और निरंतर कार्रवाई की मांग की है, साथ ही व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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