भदरिया में पौराणिक अवशेष स्थल पर युद्ध स्तर से कार्य जारी, चांदन नदी के बहाव को मोड़ने के लिए बनाया गया पायलट चैनल

Updated at : 23 Dec 2020 8:21 AM (IST)
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भदरिया में पौराणिक अवशेष स्थल पर युद्ध स्तर से कार्य जारी, चांदन नदी के बहाव को मोड़ने के लिए बनाया गया पायलट चैनल

सीएम नीतीश कुमार के भदरिया दौरा के बाद यहां मिले पौराणिक अवशेष स्थल पर युद्ध स्तर से कार्य किया जा रहा है. मालूम हो कि सीएम ने पौराणिक अवशेष के खुदाई के पूर्व भदरिया के नजदीक बह रही चांदन नदी की मुख्य धार को 1995 के मुख्य चैनल की ओर से मोड़ने का निर्देश दिया था. ताकि पौराणिक अवशेष स्थल का खुदाई करायी जा सके. जिसके बाद जल संसाधन विभाग के बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल भागलपुर की तकनीकी टीम द्वारा चांदन की मुख्य धारा को मोड़ने का कार्य विगत सप्ताह से ही शुरू कर दिया गया है.

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सीएम नीतीश कुमार के भदरिया दौरा के बाद यहां मिले पौराणिक अवशेष स्थल पर युद्ध स्तर से कार्य किया जा रहा है. मालूम हो कि सीएम ने पौराणिक अवशेष के खुदाई के पूर्व भदरिया के नजदीक बह रही चांदन नदी की मुख्य धार को 1995 के मुख्य चैनल की ओर से मोड़ने का निर्देश दिया था. ताकि पौराणिक अवशेष स्थल का खुदाई करायी जा सके. जिसके बाद जल संसाधन विभाग के बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल भागलपुर की तकनीकी टीम द्वारा चांदन की मुख्य धारा को मोड़ने का कार्य विगत सप्ताह से ही शुरू कर दिया गया है.

चांदन नदी के मुख्य धार को अवशेष स्थल के दक्षिण तारडीह के निकट ही मोड़ कर पूरब की ओर बहाया जा रहा है. इस संबंध में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल भागलपुर के सहायक अभियंता मुकेश कुमार ने बताया है कि तारडीह के निकट पायलट चैनल तैयार किया जा रहा है, जो अंतिम चरण में है. पानी की धार को मोड़ने के लिए बालू का ही एक तटबंध बनाया गया है, जिसकी लंबाई करीब 4350 मीटर है एवं चौड़ाई बेड लेवल पर 10 मीटर व टॉप पर 14 से 15 मीटर की है. पानी की धार को मोड़ने के लिए दो दर्जन से अधिक पोकलेन को लगाया गया है. कार्य को अंतिम रूप दे दिया गया है. फिलवक्त पानी के बहाव को मुख्य चैनल की ओर मोड़ दिया गया है. कार्य को आज शाम तक अंतिम रूप से पूरा कर लिये जाने का अनुमान है.

सीएम के निर्देश के बाद बिहार विकास विरासत समिति के तीन सदस्यीय टीम के द्वारा विगत दिनों बांका के भदरिया पहुंच कर खुदाई का कार्य किया जा रहा है. चूंकि बिहार विकास विरासत समिति को अत्यधिक खुदाई की अनुमति नहीं होने के कारण फिलवक्त टीम के सदस्यों द्वारा महज एक-दो फीट बालू की खुदाई कर पौराणिक अवशेषों का जायजा लिया जा रहा है.

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जानकारी के अनुसार, टीम के सदस्यों को उक्त स्थल पर ईंटों से बनी पौराणिक भवनों के अवशेष समूह मिले हैं. साथ ही उक्त स्थल पर छोटे-छोटे भवनों के आकार के कई समूह देखने को मिले हैं, जो करीब 9×18 मीटर, 9×9 मीटर है. बीच में एक लंबी दीवार भी मिली है. इससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि उक्त जगह पर पौराणिक भवनों का अवशेष विद्यमान है, जो एक लाइन में कई संरचना में मौजूद है.

हालांकि टीम के सदस्यों द्वारा अाधिकारिक तौर पर मामले की कोई जानकारी नहीं दी गयी है. लेकिन बताया जा रहा है कि बिहार विकास विरासत समिति की टीम एक सर्वे रिपोर्ट विभाग को जमा करेगी, जिसके बाद भारत सरकार की अनुमति के बाद पुरातत्व विभाग द्वारा जल्द ही उक्त स्थल की खुदाई शुरू कर दी जायेगी.

जानकारी के अनुसार, टीम में बिहार विरासत विभाग के आर्केलॉजिस्ट ओएसी राय, सर्वेयर रवि कुमार व राजा कुमार शामिल हैं. हालांकि कार्य स्थल पर बैरिकेडिंग कर दी गयी है. किसी को भी वहां आने-जाने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गयी है. कार्यस्थल पर पुलिस बलों की तैनाती की गयी है.

Posted By: Thakur Shaktilochan

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