ढ़ाड़ावारी की आदिवासी महिलाओं ने सीखा मशरूम की खेती के गुर

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ढ़ाड़ावारी की आदिवासी महिलाओं ने सीखा मशरूम की खेती के गुर

ढ़ाड़ावारी की आदिवासी महिलाओं ने सीखा मशरूम की खेती के गुर

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पूसा विश्वविद्यालय के तत्वावधान में दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन बांका: डाॅ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय पूसा के तत्वावधान में एडवांस ऑफ मशरूम रिसर्च अखिल भारतीय समन्वित मशरूम अनुसंधान परियोजना (अनुसूचित जनजाति उप योजना) अंतर्गत दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. समुखिया समीप ढ़ाड़ावारीआदिवासी बाहुल्य गांव में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अन्वेषक, डाॅ. राम प्रवेश प्रसाद व पूर्व प्राध्यापक व मशरुम सलाहकार डाॅ. दयाराम ने विधिवत किया. मास्टर ट्रेनर विनीता कुमारी ने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया. महिलाओं को मशरूम के प्रकार, मशरूम उत्पादन की विधि, बीज की उपलब्धता सहित अन्य बातों की विस्तृत जानकारी दी गयी. साथ प्रायोगिक तौर पर भी महिलाओं को मशरूम बैग तैयार करने की बारीकी से अवगत कराया गया. दूसरे दिन मशरूम से बनाये जाने वाले व्यंजन की जानकारी दी जायेगी. विशेषज्ञों ने कहा कि घर बैठे महिलाएं कम लागत में मशरुम की खेती कर अच्छी-खासी आमदनी कर सकती हैं. इसका बाजार भी लगातार बढ़ता जा रहा है. आसपास क्षेत्र के साथ दूसरे जिले व राज्यों में इसकी मांग है.

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सुभाष वैद्य

लेखक के बारे में

By सुभाष वैद्य

सुभाष वैद्य प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के बांका कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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