श्रावणी मेले में बचे महज 22 दिन, सजने लगा कांवरिया मार्ग: बांका में तैयारियां तेज

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कांवरिया मार्ग के किनारे सजने लगा दुकान.

कांवरिया मार्ग के किनारे सजने लगा दुकान.

Shravani Mela Preparations: 30 जुलाई से शुरू हो रहे सावन मास की तैयारियां बांका में तेज हो गई हैं. कांवरिया मार्ग पर दुकानें सजने लगी हैं और मेले की रौनक दिखने लगी है. इस बार सावन में चार सोमवारी व्रत पड़ रहे हैं, जिनका विशेष महत्व है.

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बांका से चंदन कुमार की रिपोर्ट

Shravani Mela Preparations: श्रावणी मेले को लेकर कांवरिया मार्ग के किनारे विभिन्न प्रकार के सेवा शिविर और दुकानें लगाने वाले लोग पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं. दुकानदारों ने अपनी जगह को चिह्नित करने और जमीन किराये पर लेने के लिए बुकिंग करानी शुरू कर दी है. मार्ग के किनारे दुकानें खड़ी करने के लिए बांस-बल्ले गिराए जाने लगे हैं, जिससे मेले की रौनक अभी से दिखने लगी है.

30 जुलाई से शुरू होगा सावन का पवित्र महीना

वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई से होगी, जो लगभग एक महीने तक चलकर 28 अगस्त को समाप्त होगा. हिंदू धर्म में सावन को चातुर्मास का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है, जो तपस्या, व्रत, रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए बेहद शुभ और कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है.

पहले सोमवार पर बन रहा है बेहद शुभ योग

इस साल सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है, जो धार्मिक दृष्टि से बहुत खास है. बौंसी गुरुधाम के पंडित गोपाल शरण ने बताया कि इस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि होगी. ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन उत्तरभाद्रपदा और रेवती नक्षत्र के प्रभाव के साथ-साथ सुकर्मा योग और धृति योग का निर्माण हो रहा है, जो इस दिन की शुभता को कई गुना बढ़ा देगा.

माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है. इस पावन महीने में श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखकर महादेव की आराधना करते हैं. वहीं अविवाहित लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए सावन के सभी सोमवार का व्रत रखती हैं और हर मंगलवार को मंगला गौरी की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं.

समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है महत्व

श्रावण मास का महत्व पौराणिक समुद्र मंथन की कथा से गहराई से जुड़ा है. ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले विनाशकारी विष को सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था, जिससे वे नीलकंठ कहलाए. विष के असर और जलन को कम करने के लिए देवताओं ने उन पर पवित्र गंगाजल और दूध चढ़ाया था. यही कारण है कि सावन में शिवभक्त दूर-दूर से गंगाजल लाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं.

Shravani Mela Preparations: इस बार सावन में पड़ रही हैं चार सोमवारी

इस वर्ष के सावन महीने में कुल चार सोमवारी व्रत पड़ रहे हैं, जिनकी तिथियां इस प्रकार निर्धारित हैं:

  • पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त
  • दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त
  • तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त
  • चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त

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दिव्यांशु प्रशांत

लेखक के बारे में

By दिव्यांशु प्रशांत

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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