सावन में सूखे खेतों की बढ़ी चिंता, बारिश की राह देख रहे किसान; धूप-उमस से स्कूली बच्चे और ग्रामीण भी बेहाल
बारिश न होने से सूखे खेत की तस्वीर.| Prabhat Khabar Network
इस सावन महीने में सूखे की मार ने किसानों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बारिश की कमी से धान की फसल सूख रही है और खेतों में दरारें पड़ रही हैं. ग्रामीण राहत की आस लगाए बैठे हैं.
पवित्र सावन का महीना चल रहा है, लेकिन इस बार बारिश की कमी ने किसानों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिस सावन में आसमान से अमृत जैसी बारिश की बूंदें बरसने और चारों ओर हरियाली छाने की उम्मीद रहती है, वहां तेज धूप और उमस भरी गर्मी लोगों को बेहाल कर रही है. मानसून की बेरुखी का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ा है. धान की रोपाई के बाद अब खेतों में पानी की कमी होने लगी है और कई जगह मिट्टी में दरारें पड़ने लगी हैं.
सावन में सूखे पड़े जलस्रोत, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
बारिश की कमी का असर इलाके के पारंपरिक जलस्रोतों पर भी साफ दिखाई देने लगा है. नदी, नाले, पोखर और तालाबों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है. सुबह होते ही तेज धूप अपना असर दिखाने लगती है. उमस और चिलचिलाती गर्मी के कारण आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है.
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल से लौटने वाले छोटे बच्चों, खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीण मजदूरों को हो रही है. दोपहर के समय तेज धूप के बीच बच्चों को स्कूल से घर लौटते देखा जा रहा है. गर्मी और उमस के कारण लोगों को सावन में भी जेठ जैसी तपिश का सामना करना पड़ रहा है.
धान के खेतों में पड़ने लगीं बड़ी-बड़ी दरारें
बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है. सावन की शुरुआत में किसानों ने किसी तरह कर्ज लेकर महंगे डीजल पंपसेट के सहारे धान की रोपाई की थी. उन्हें उम्मीद थी कि रोपाई के बाद मानसून सक्रिय होगा और खेतों को पर्याप्त पानी मिल जाएगा.
लेकिन लगातार बारिश नहीं होने और तेज धूप के कारण खेतों में जमा पानी सूख गया है. नमी खत्म होने से धान के खेतों की मिट्टी फटने लगी है और कई जगह बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं. फसल को बचाने के लिए किसान अब दोबारा सिंचाई का सहारा लेने को मजबूर हैं.
डीजल और बिजली की समस्या ने बढ़ाया संकट
किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है. लगातार पंपसेट चलाने से डीजल का खर्च बढ़ रहा है. वहीं बिजली की आवाजाही के कारण सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है.
किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सीमित संसाधनों में वे कब तक खेतों की सिंचाई करते रहेंगे. खेती में पहले ही लागत बढ़ चुकी है और अब बारिश की कमी ने आर्थिक बोझ और बढ़ा दिया है.
आसमान की ओर टिकी किसानों की निगाहें
बारिश की उम्मीद में किसान और ग्रामीण अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं. हर किसी को घने बादलों के छाने और झमाझम बारिश का इंतजार है. किसानों का कहना है कि समय रहते अच्छी बारिश हो गयी तो धान की फसल को बचाया जा सकता है, अन्यथा मेहनत और पूंजी दोनों पर संकट गहरा सकता है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से सूखे जैसे हालात को देखते हुए कृषि कार्य के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही प्रभावित किसानों को आवश्यक सहायता और राहत उपलब्ध कराने की भी अपील की गयी है. सावन के इस मौसम में अब किसानों की उम्मीद सिर्फ बादलों पर टिकी है.
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लेखक के बारे में
By गौरव कश्यप
गौरव कश्यप प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. पंजवारा (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.
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