मंदार पर्वत पर उमड़ रहा आस्था का सैलाब: देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालु, जानें भगवान मधुसूदन मंदिर के कपाट खुलने और आरती का पूरा समय

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 22 May 2026 7:55 AM

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मंदार के पापहारिणी सरोवर स्थित समुंद्र मंथन के मथनी का प्रतीक चिन्ह

बिहार के बांका जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध मंदार पर्वत का ऐतिहासिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व सदियों पुराना है. यहाँ के विख्यात भगवान मधुसूदन मंदिर और अष्टकमल मंदिर में हर दिन देश के कोने-कोने सहित विदेशों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही पवित्र मंदार पर्वत है जिसका उपयोग देवों और दानवों ने समुद्र मंथन के समय मथनी के रूप में किया था.

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समुद्र मंथन का गवाह है मंदार, पापहारिणी सरोवर में स्नान का है विशेष महत्व

धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, अमृत की खोज के लिए किए गए पौराणिक समुद्र मंथन में मंदार पर्वत ने मुख्य भूमिका निभाई थी. इसके प्रतीक चिन्ह आज भी मंदार की तराई में स्थित पवित्र पापहारिणी सरोवर के निकट जीवंत रूप में अवस्थित हैं. श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि पापहारिणी सरोवर में डुबकी लगाने के बाद सच्चे मन से भगवान मधुसूदन और अष्टकमल मंदिर में पूजा करने वाले भक्तों की हर अधूरी मन्नत मां अवश्य पूरी करती हैं.

आगामी 31 अक्टूबर तक लागू रहेगा भगवान मधुसूदन का विशेष दिनचर्या शेड्यूल

मंदार स्थित प्रसिद्ध भगवान मधुसूदन मंदिर में आगामी 31 अक्टूबर तक के लिए भगवान की विशेष नित्य क्रियाओं और पूजा का विधिवत समय निर्धारित किया गया है. मंदिर के मुख्य पुजारी विंदेश्वरी उर्फ पटल झा और लक्ष्मण झा द्वारा भगवान की सभी नित्य क्रियाएं संपन्न कराई जा रही हैं.

भगवान मधुसूदन की दैनिक पूजा का विस्तृत समय और दिनचर्या निम्नलिखित है:

  • पट खुलने का समय: अहले सुबह 05:00 बजे मंदिर के कपाट (पट) आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे, जिसके तुरंत बाद पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी.
  • सुबह की महाआरती: सुबह 07:30 बजे भगवान की मुख्य सुबह की आरती संपन्न होगी, जिसके पूर्व ठाकुर जी को पंचामृत से स्नान कराकर विशेष चंदन लेपन किया जाएगा.
  • राजभोग (दोपहर का भोग): दोपहर 12:00 बजे भगवान को चावल, दाल, शुद्ध घी की सब्जी सहित विभिन्न प्रकार के सात्विक व्यंजनों का उत्तम भोग अर्पित किया जाएगा.
  • संध्या दर्शन व भव्य श्रृंगार: शाम को मंदिर के कपाट पुनः खुलने के बाद संध्या 06:30 बजे भगवान का अलौकिक भव्य श्रृंगार किया जाएगा और महाआरती होगी.
  • शयन भोग व पट बंदी: रात्रि में भगवान को पूड़ी, दूध, चीनी, काजू, किशमिश, पेड़ा सहित अन्य उत्तम मिष्ठानों का भोग लगाया जाएगा, जिसके बाद रात्रि 08:30 बजे मंदिर के पट विश्राम के लिए बंद कर दिए जाएंगे.

‘आज का दर्शन’: बांका के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी सुबह 5 बजे खुलेंगे कपाट

‘आज का दर्शन’ विशेष श्रृंखला के तहत बांका शहर और आसपास के अन्य प्रमुख शिवालयों और सिद्धपीठों में भी सुबह से ही विशेष अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की जाएगी.

  • शहरी क्षेत्र के मंदिर: बांका शहर के प्रसिद्ध भयहरण स्थान, बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर और जगतपुर स्थित ठाकुरबाड़ी सहित अन्य सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए सुबह 05:00 बजे ही खोल दिए जाएंगे, जहां सुबह विशेष जलाभिषेक और आरती होगी.
  • अष्टकमल मंदिर का शेड्यूल: मंदार स्थित अष्टकमल मंदिर में भी विशेष व्यवस्था की गई है. यहाँ सुबह 07:30 बजे मुख्य पुजारियों द्वारा भगवान का पंचामृत स्नान कराया जाएगा. इसके बाद दोपहर 12:00 बजे राजभोग लगाया जाएगा और ठीक संध्या 06:00 बजे भगवान की भव्य श्रृंगार पूजा व महाआरती आयोजित की जाएगी.

बांका से चंदन कुमार की रिपोर्ट:

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