बारिश की कमी से शंभुगंज में धान रोपाई प्रभावित, निजी बोरिंग के सहारे खेती, किसानों ने मांगा डीजल अनुदान
किसान द्वारा धान रोपाई के लिए बोरिंग से सिंचाई करने का | Prabhat Khabar Network
बांका के शंभुगंज प्रखंड में सूखे का कहर जारी है, जिससे धान की रोपाई गंभीर संकट में पड़ गई है. केवल 25% लक्ष्य पूरा हुआ है, और किसान महंगे निजी बोरिंग के सहारे खेती कर रहे हैं. हल्की बारिश से थोड़ी उम्मीद जगी है, लेकिन डीजल अनुदान की मांग तेज हो गई है.
Banka News: बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड में बारिश की कमी ने इस बार धान की खेती को गंभीर संकट में डाल दिया है. पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं और किसान महंगे सिंचाई साधनों के सहारे किसी तरह रोपाई करा रहे हैं. स्थिति यह है कि अब तक निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले केवल 25 प्रतिशत धान रोपाई ही हो सकी है. हालांकि मंगलवार शाम से शुरू हुई हल्की बूंदाबांदी ने किसानों के चेहरों पर थोड़ी उम्मीद जरूर जगाई है.
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खेती की लागत और बढ़ेगी तथा उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि सिंचाई के लिए निजी बोरिंग पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है और बिजली आपूर्ति भी संतोषजनक नहीं है.
12 हजार हेक्टेयर में धान खेती का लक्ष्य
इस वर्ष शंभुगंज प्रखंड में लगभग 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. लेकिन मानसून की कमजोर स्थिति के कारण रोपाई की गति काफी धीमी बनी हुई है.
कई खेतों में पानी नहीं पहुंच पाने के कारण किसान रोपाई टाल रहे हैं, जबकि कुछ किसान निजी बोरिंग के सहारे सीमित क्षेत्र में खेती कर पा रहे हैं. नदी, तालाब और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से सिंचाई संकट और गहरा गया है.
बोरिंग से सिंचाई, बढ़ती लागत से परेशान किसान
स्थानीय किसानों ने बताया कि इस बार धान की खेती करना किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं है. बोरिंग से एक बीघा खेत में पटवन कराने पर करीब 800 रुपये तक खर्च आ रहा है.
किसान बसंत सिंह, राजाराम सिंह, मुरारी यादव, किशुन मंडल, अजय सिंह, राजीव सिंह, अजय यादव और रामधारी सिंह सहित कई किसानों ने कहा कि पहले डीजल अनुदान मिलने से सिंचाई खर्च में कुछ राहत मिल जाती थी, लेकिन अब वह सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके साथ ही बिजली आपूर्ति की अनियमित स्थिति ने खेती की लागत और बढ़ा दी है.
हल्की बूंदाबांदी से जगी नई उम्मीद
मंगलवार की शाम से रात तक हुई हल्की बारिश ने किसानों में कुछ उम्मीद जगाई है. हालांकि यह वर्षा बड़े पैमाने पर रोपाई के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही, लेकिन इससे खेतों में नमी बढ़ी है और किसानों को उम्मीद है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही तो रोपाई की रफ्तार तेज हो सकती है.
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान लगातार आसमान की ओर नजर लगाए हुए हैं और अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं.
डीजल अनुदान बहाल करने की मांग
किसानों ने सरकार से पटवन और डीजल अनुदान योजना फिर से शुरू करने की मांग की है. उनका कहना है कि महंगी सिंचाई के कारण छोटे और सीमांत किसानों पर सबसे अधिक आर्थिक दबाव पड़ रहा है.
उनका मानना है कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली, तो खेती की लागत बढ़ने के साथ-साथ धान उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है.
Banka News: कृषि विभाग ने क्या कहा
प्रखंड कृषि पदाधिकारी संकेत तिवारी ने बताया कि वर्षा की कमी के कारण फिलहाल धान रोपाई की रफ्तार धीमी है, लेकिन अभी खेती के लिए पर्याप्त समय शेष है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि सावन माह के अंत तक अच्छी वर्षा होने पर शत-प्रतिशत धान रोपाई का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है.
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लेखक के बारे में
By ठाकुर विनोद कुमार
ठाकुर विनोद कुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. शंभूगंज (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों में रुचि रखते हैं.
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