70 रुपये की थाली बनी कांवरियों की पहली पसंद, श्रावणी मेला में ‘दीदी की रसोई’ ने जीता शिवभक्तों का दिल

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भोजन की थाली के साथ जीविका दीदी | Prabhat Khabar Network

भोजन की थाली के साथ जीविका दीदी. | Prabhat Khabar Network

Shravani Mela 2026 : श्रावणी मेला 2026 में 'दीदी की रसोई' शिवभक्तों के लिए एक वरदान साबित हो रही है. मात्र 70 रुपये में स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन की थाली श्रद्धालुओं की पहली पसंद बन गई है. स्वच्छता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के कारण यह पहल खूब सराही जा रही है.

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Shravani Mela 2026 : जिला नियंत्रण कक्ष के समीप संचालित ‘दीदी की रसोई’ में जीविका समूह की महिलाएं पूरी साफ-सफाई और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए भोजन तैयार कर रही हैं. यहां मात्र 70 रुपये की थाली में चावल, दाल, सब्जी, भुजिया, पापड़, अचार और नींबू परोसा जा रहा है. वहीं जो श्रद्धालु चावल के स्थान पर रोटी खाना चाहते हैं, उन्हें पांच रोटियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं.

एक ही जगह मिल रही हर जरूरी सुविधा

भोजन के अलावा यहां नींबू चाय, दूध चाय, दही-चूड़ा, कचौड़ी-सब्जी, सत्तू पराठा, पानी की बोतल और कोल्ड ड्रिंक जैसी अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री भी उचित दर पर उपलब्ध है. इससे लंबी पैदल यात्रा कर रहे कांवरियों को एक ही स्थान पर उनकी जरूरत की अधिकांश चीजें आसानी से मिल रही हैं.

स्वच्छता और गुणवत्ता ने जीता श्रद्धालुओं का भरोसा

जीविका दीदी खुशबू देवी ने बताया कि भोजन तैयार करने से लेकर परोसने तक हर स्तर पर स्वच्छता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है. ताजा और पौष्टिक भोजन मिलने से श्रद्धालु संतुष्ट होकर यहां बार-बार आ रहे हैं.

कांवरियों ने की खुलकर सराहना

भोजन कर रहे श्रद्धालुओं ने बताया कि कम कीमत में स्वादिष्ट, ताजा और घर जैसा भोजन मिलने से उनकी यात्रा काफी आसान हो गई है. उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से आर्थिक बोझ भी कम हुआ है और बाहर का महंगा भोजन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ रही.

महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया अवसर

जीविका की यह पहल केवल कांवरियों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम भी बन रही है. जीविका बांका के एरिया कोऑर्डिनेटर दिनकर कुमार ने बताया कि इस पहल से महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ सेवा का अवसर भी प्राप्त हुआ है.

कांवरिया पथ पर 13 स्थानों पर खुली ‘दीदी की रसोई’

श्रावणी मेला में पहली बार बांका जिले के धौरी से दुम्मा बॉर्डर तक कुल 13 स्थानों पर ‘दीदी की रसोई’ शुरू की गई है. कांवरिया पथ के सभी टेंट सिटी, सरकारी धर्मशाला और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर संचालित इन रसोइयों में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को स्वच्छ, पौष्टिक और किफायती भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे श्रावणी मेला की व्यवस्थाओं में एक नई और सराहनीय पहल जुड़ गई है.


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दीपक चौधरी

लेखक के बारे में

By दीपक चौधरी

दीपक चौधरी प्रिंट माध्यम में 23 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कटोरिया (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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