शंभुगंज में बिजली संकट से जनजीवन बेहाल, सावन में दिनभर कटौती, रात में ब्लैकआउट जैसी स्थिति

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बिजली ट्रांसफार्मर का | Prabhat Khabar Network

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शंभुगंज में बिजली की आंखमिचौली से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है. 24 घंटे में महज 6-7 घंटे बिजली मिलने से खेती और घरेलू कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.

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Banka News: बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड में सावन के महीने में बिजली की आंखमिचौली लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. उमस भरी गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती से जनजीवन प्रभावित हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की निर्बाध बिजली आपूर्ति की घोषणा का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा और पिछले करीब एक सप्ताह से स्थिति बेहद खराब बनी हुई है.

स्थानीय लोगों के अनुसार पूरे दिन में मुश्किल से 6 से 7 घंटे ही बिजली मिल रही है. लगातार कटौती के कारण घरेलू कामकाज से लेकर खेती, छोटे कारोबार और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है.

शाम होते ही शुरू हो जाती है कटौती

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी शाम और रात के समय होती है. अक्सर शाम ढलते ही बिजली चली जाती है और कई बार देर रात या अगले दिन ही आपूर्ति बहाल होती है.

पंकज शर्मा, राजेश निराला, गौरव झा, रामधारी मंडल, नरेस सिंह, अजय यादव, पाण्डव सिंह और राजीव सिंह सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि सावन में पहले कभी इतनी खराब बिजली व्यवस्था नहीं देखी गई थी.

खेती और सिंचाई पर पड़ा सीधा असर

इन दिनों धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण समय चल रहा है. किसानों का कहना है कि अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण मोटर और पंपसेट समय पर नहीं चल पा रहे हैं, जिससे खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है.

ग्रामीणों के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो खेती की लागत बढ़ेगी और फसलों पर भी असर पड़ सकता है.

छोटे कारोबार और पढ़ाई भी प्रभावित

बिजली संकट का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है. स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों का काम भी प्रभावित हो रहा है. कई व्यवसाय ऐसे हैं जो पूरी तरह बिजली पर निर्भर हैं और बार-बार कटौती से उनका काम रुक जाता है.

वहीं विद्यार्थियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रात के समय बिजली नहीं रहने से पढ़ाई बाधित हो रही है और परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.

पेयजल संकट भी गहराया

ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश घरों में पानी की आपूर्ति मोटर के माध्यम से होती है. बिजली नहीं रहने पर मोटर नहीं चलती और पेयजल संकट पैदा हो जाता है.

लोगों का कहना है कि पहले केरोसिन उपलब्ध रहता था, लेकिन अब उसका वितरण भी सीमित हो गया है. ऐसे में बिजली कटते ही कई गांवों में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन जाती है.

शिकायत पर भी नहीं मिल रहा संतोषजनक जवाब

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार बिजली कटने के बावजूद जब विभागीय अधिकारियों को फोन किया जाता है तो संतोषजनक जवाब नहीं मिलता. इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी लगातार बढ़ रही है.

ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है ताकि सावन के दौरान लोगों को राहत मिल सके.

Banka News: विभाग ने तकनीकी फॉल्ट बताया कारण

विद्युत विभाग के कनीय अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि तकनीकी फॉल्ट के कारण कभी-कभी इस प्रकार की समस्या उत्पन्न हो जाती है.

उन्होंने कहा कि विभाग उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है और जहां भी तकनीकी खराबी आती है, उसे शीघ्र दूर करने की कार्रवाई की जाती है.

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ठाकुर विनोद कुमार

लेखक के बारे में

By ठाकुर विनोद कुमार

ठाकुर विनोद कुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. शंभूगंज (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों में रुचि रखते हैं.

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