पचास लाख रुपये झाड़ियों में दफन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Sep 2016 6:39 AM (IST)
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उदासीनता . समाहरणालय के समीप स्थित तालाब को जिर्णोद्धार की दरकार समाहरणालय के समीप स्थित तालाब का जिर्णोंद्धार व सौंदयीकरण वर्ष 2012 में करीब 50 लाख की लागत से कराया गया था.लेकिन, यह रुपये अब झाड़ियों में दफन हो रहे हैं. इसका पुन: जिर्णोंद्धार हो तो लोगों को फायदा हो. बांका : समाहरणालय के समीप […]
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उदासीनता . समाहरणालय के समीप स्थित तालाब को जिर्णोद्धार की दरकार
समाहरणालय के समीप स्थित तालाब का जिर्णोंद्धार व सौंदयीकरण वर्ष 2012 में करीब 50 लाख की लागत से कराया गया था.लेकिन, यह रुपये अब झाड़ियों में दफन हो रहे हैं. इसका पुन: जिर्णोंद्धार हो तो लोगों को फायदा हो.
बांका : समाहरणालय के समीप स्थित तालाब का जिर्णोंद्धार व सौंदयीकरण वर्ष 2012 में करीब 50 लाख की लागत से कराया गया था. लेकिन अब इस तालाब के पक्कीकरण के बाद चारों ओर बने फुलों की क्यारियां आज विरान पड़ी हैं. इन क्यारियों में अब तक फुलों का पौध न तो जिला प्रशासन के द्वारा लगवाया गया है और न ही समाहरणालय परिसर स्थित लगे फलों की देखभाल कर रहे माली द्वारा लगाया गया है.
तालाब के चारों ओर आम लोगों के बैठने के लिए बने चबूतरे के ऊपर शेड नहीं रहने से आम लोग दिन में धूप की वजह से नहीं बैठ पाते हैं और न ही बारिश के समय में बैठ पाते हैं.
तालाब सौंदयीकरण करने का जो उद्देश्य तत्कालीन जिलाधिकारी का था वह उनके तबादले के बाद पूरा नहीं हो पाया. वर्तमान में ऐसा लगता है कि 50 लाख की राशि यदि लोक कल्याणकारी योजनाओं में लगायी गयी होती, तो ज्यादा लाभदायक होता. इससे आम आदमी लाभांवित होते.
जिला प्रशासन हुआ मौन. समाहरणालय गेट के समीप स्थित सौंदयीकरण तालाब पर नजर जिलाधिकारी सहित सभी आलाधिकारियों की प्रतिदिन आते जाते उस ओर जाती है लेकिन कोई भी अधिकारी तालाब को सौंदयीकरण करने की दिशा में किसी प्रकार का पहल नहीं कराने से 50 लाख से बना तालाब बरबाद हो रहा है. इसकी सुद्धि लेने वाला कोई नहीं है.
तालाब में उगे हैं जंगल
समाहरणालय के मुख्य द्वार के सामने स्थित तालाब सौंदयीकृत जिला प्रशासन के द्वारा करायी गयी है. तालाब की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि तालाब के बीच एवं चारों ओर काश के पौधे उग आये है. पौधे इतने घने हो चुके हैं कि आम आदमी दिन के वक्त भी तालाब के चारो ओर बने चबुतरों पर बैठ नहीं पाते है क्योंकि उन्हें हमेशा डर बना रहता है कि कहीं इतने घने पौधे से सांप व जहरीला कीट पतंग ना काट कर घायल कर दे. इस डर से आम आदमी इसमें प्रवेश नहीं करते हैं.
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