जिले में 32 फीट तक गिरा जलस्तर
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :29 May 2015 9:52 AM
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बांका: जेठ की दोपहरी में लोगों का चलना फिरना मुश्किल हो गया है. वहीं आम लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. लोग स्वास्थ्य प्रमंडल बांका के क्षेत्र अंतर्गत प्रखंड वार नलकूपों के जलस्तर को मानें तो जिले के 11 प्रखंडों में से सबसे अधिक धोरैया प्रखंड में 32 […]
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बांका: जेठ की दोपहरी में लोगों का चलना फिरना मुश्किल हो गया है. वहीं आम लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. लोग स्वास्थ्य प्रमंडल बांका के क्षेत्र अंतर्गत प्रखंड वार नलकूपों के जलस्तर को मानें तो जिले के 11 प्रखंडों में से सबसे अधिक धोरैया प्रखंड में 32 फीट जलस्तर नीचे चला गया है.
वहीं दूसरे पायदान पर रजाैन प्रखंड है जिसका 28 फीट जलस्तर नीचे गया है एवं तीसरे स्थान पर 27 फीट फुल्लीडुमर प्रखंड का जलस्तर घटा है. कटोरिया प्रखंड में 26 फीट, बौंसी प्रखंड में 23 फीट, बांका में 22 फीट, चांदन व बेलहर में 21 फीट, बाराहाट प्रखंड में 20 फीट, शंभुगंज में 19 फीट व अमरपुर प्रखंड में सबसे कम 13 फीट जलस्तर गिरा है. यह आंकड़ा पीएचइडी विभाग बांका के द्वारा 18 मई 2015 को लिया गया था. वहीं बांका जिले का औसत 23 फीट जलस्तर घटा है.
किस प्रकार घटता है जल स्तर
जिला चारों ओर नदियों से घिरा है. कहीं चांदन नदी तो कहीं ओढ़नी नदी, कहीं बदुआ तो कहीं चीर, सुखनियां, डकाय नदी सहित अन्य नदियों रहने के बाद बांका का जल स्तर कभी घटना नहीं चाहिए, लेकिन बांका के नदियों से बालू का जो दोहन पिछले कई वर्षो से हो रहा है जल स्तर घटने का यही मुख्य कारण है. जल स्तर को समान बनाये रखने के लिए बालू उठाव पर रोक जब तक नहीं लगती तब तक इसी तरह गरमी के दिनों में पानी के लिए लोग तड़पते रहेंगे.
जल स्तर सामान्य बनाने के लिए क्या करें उपाय
जलस्तर नीचे ना जाकर सामान्य बना रहे इसके लिए प्रशासन व आम आदमी को सजग होना होगा. जिले में ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधा लगाया जाय. इससे अत्यधिक बारिश होगी और भूमि की नमी बनी रहेगी. जहां पेड़, पौधे अधिक होंगे वहां ज्यादा हरियाली होगी और वहां के किसान व इलाका समृद्ध होगा. जिससे जल स्तर नहीं घटेगा. जिले में छोटे-बड़े बहुत सारे जलाशय है जो गरमी के दिनों में अक्सर सुख जाया करते हैं. इसका मुख्य कारण है जलाशयों में गाद जमा होना. प्रशासन यदि पहल कर जलाशयों से गाद को निकलवा दें तो जलाशय के आसपास के इलाकों का जल स्तर नहीं भागेगा.
बालू का उठाव होने से नदी गहरी हो गयी है और खेत ऊंचे हो गये हैं, जिससे खेतों में पानी नहीं पहुंच पाती है. जिस कारण पटवन की समस्या उत्पन्न होती है.
कहते हैं कार्यपालक अभियंता
इस संबंध में पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि वर्तमान वर्ष में जल स्तर ज्यादा गिरा है. इसका मुख्य कारण पारा का अत्यधिक होना है. हाल के कुछ दिनों में पारा 40 डिग्री से हमेशा ज्यादा ही रहा है. साथ ही प्रकृति के साथ मनुष्यों का खिलवाड़ भी जारी है. जिस रफ्तार से पेड़ पौधे काटे जा रहे हैं उसके अनुरूप लगाये नहीं जा रहे हैं. यह भी एक कारण है जल स्तर नीचे जाने का. समय रहते यदि मनुष्य नहीं चेते तो आने वाले समय में पानी के लिए हाहाकार मचेगा. पानी को अनावश्यक बरबाद न करें.
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