एक समय में वर्धमान का हिस्सा हुआ करता था बांका, 1991 में बना जिला

By Prabhat Khabar Digital Desk
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बिभांशु, बांका : 21 फरवरी 1991 को भागलपुर से कटकर पृथक जिला के रुप में स्थापित बांका का इतिहास महज 30 वर्ष पूर्व की नहीं है. मसलन, बांका का अपना गौरवपूर्ण इतिहास रहा है. दानवीर कर्ण की यह भूमि अंग क्षेत्र व मंदार नगरी की छत्रछाया में बसा हुआ है. चांदन, ओढ़नी, लोहागढ़ जैसी प्रमुख नदियों की कल-कल धारा के साथ बांका की जीवन नैया हरी-भरी है.

इतिहासकारों की मानें तो यह धरती वर्ष 1854 के आसपास वर्धमान जिले का एक भाग हुआ करता था. वर्धमान में उस समय भागलपुर, मुंगेर, जमुई भी आता था. भागलपुर के अधीन बांका को किया गया. बांका को एसडीओ क्षेत्र घोषित किया गया. पहले एसडीओ मुख्यालय अमरपुर, बाद में बौंसी व अंत में बांका बना दिया गया. आजादी के समय बांका की संख्या सात-आठ लाख के करीब हुआ करती थी.
मौजूदा समय की बात करें तो जनसंख्या 30 लाख से उपर होगा. स्थापना से अबतक इनती छोटी सी उम्र में बांका की धरती काफी उर्वर रही है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क सहित अन्य अत्याधुनिक विकास के साथ यह जिला कदम-कदम मिलाकर चल रहा है. इन 29 वर्ष की आयु में जिला की उपलब्धि काफी रही है. बांका जिला की स्थापना तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने किया था.
एक दिलचस्प बात यह है कि बांका जिला स्थापित कर शाम चार बजे जमुई पहुंचने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने जमुई को भी जिला का दर्जा दिया. बांका व जमुई जिला का स्थापना दिवस एक ही दिन 21 फरवरी 1991 को मनाया जाता है. ज्ञात हो कि बांका जिला के बाद प्रथम जिलाधिकारी के रुप में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुबोध केशव ने पदभार संभाला था. इसके बाद से अबतक 37 डीएम ने अपनी सेवा दी है.
बांका एक नजर में
क्षेत्रफल-3018 वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात-907
साक्षरता-58.17
सांसद-गिरिधारी यादव
डीएम-सुहर्ष भगत
विधायक- बांका- रामनारायण मंडल, धोरैया-मनीष कुमार, कटोरिया-स्वीटी सीमा हेम्ब्रम, अमरपुर-जनार्दन मांझी, बेलहर-रामदेव यादव.
जिला बनने के बाद बांका की बड़ी उपलब्धि
बांका-राजेंद्र नगर(पटना) व देवघर रेल सेवा, डिस्ट्रीक्ट कोर्ट, पोल्टेक्निक कॉलेज, जेएमएम कॉलेज, मंदार रोपवे (निर्माणाधीन), गैस बॉटलिंग प्लांट, आईटीआई कॉलेज, न्यू पुलिस लाइन इत्यादि है.
1952 से ही बांका लोकसभा क्षेत्र की है पहचान
भले ही बांका जिला की स्थापना 21 फरवरी 1991 में हुयी हो, परंतु बांका का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है. जब स्वतंत्र देश में प्रथम लोकसभा का चुनाव 1952 हुआ, उस समय बांका लोकसभा में भी चुनाव हुआ था. इससे पहले अंग्रेजों के साथ हुए आंदोलन में बांका की धरती काफी चर्चित रही थी. मसलन, दो दर्जन के आसपास रणबांकुरों ने अपनी मिट्टी के लिए अपना लहू बहा दिया था. क्षेत्रफल की दृष्टिकोण से यह भागलपुर जैसे प्रमुख जिला से बड़ा है.
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