बैंकों के विलय के विरोध व वेतन वृद्धि को ले बैंक रहे बंद, करोड़ों का नुकसान
Updated at : 23 Oct 2019 9:13 AM (IST)
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बांका : ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन एवं बैंक इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर मंगलवार को बांका में अधिकतर बैंक बंद रहा. ग्राहकों को परेशानियां हुई. बैंक कर्मचारियों ने बैंक के मुख्य दरवाजा पर ताला जड़कर सरकार के प्रति रोष जताया.अपनी मांगो को लेकर आवाज बुलंद की. इस दौरान बैंक कर्मचारियों ने विभिन्न […]
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बांका : ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन एवं बैंक इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर मंगलवार को बांका में अधिकतर बैंक बंद रहा. ग्राहकों को परेशानियां हुई. बैंक कर्मचारियों ने बैंक के मुख्य दरवाजा पर ताला जड़कर सरकार के प्रति रोष जताया.अपनी मांगो को लेकर आवाज बुलंद की.
इस दौरान बैंक कर्मचारियों ने विभिन्न बैंकों विलय एवं सरकार पर निजीकरण का आरोप लगाते हुए जमकर भड़ास निकाली. बैंक कर्मचारियों ने कहा कि बैंकों से विलय से कर्मचारियों के सेवा पर असर पड़ेगा. कर्तव्यों के स्वायत्तता में खलल पैदा होगी. सरकार द्वारा यह फैसला जल्दीबाजी में लिया गया है. मंथन की आवश्यकता है. हड़ताल की वजह से एटीएम भी बंद रहा, जिससे ग्राहकों को पैसे की निकासी में भी परेशानियां हुई. हड़ताल में राष्ट्रीयकृत बैंकों को छोड़कर अधिकतर निजी बैंक बंद मिला.
जानकारी के अनुसार बैंक कर्मचारियों के हड़ताल से यहां करोड़ों के करोबार का नुकसान हुआ है. संघ के जिला महामंत्री चंदन कुमार, चेयरमैन एसएन सिंह, पंकज ठाकुर, समीर कुमार, मनीष रंजन, बबीता द्विवेदी, कृष्णमुरारी, विनय कुमार मिश्रा, वरुण कुमार, अरुण कुमार, शशि कुमार आदि ने सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताया. कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों की वजह से आम जनता परेशान हैं.
वहीं हड़ताल में शामिल बैंक कर्मचारी प्रमोद ठाकुर, दिनेश पासवान, शोभा देवी, सचिन कुमार, रियाज अहमद, नवीन शर्मा आदि ने कहा कि सरकार बैंकों के विलय एवं वेतन वृद्धि पर जल्द से जल्द सरकार मजबूत फैसला लें, अन्यथा आगे विशाल आंदोलन किया जायेगा. मालूम हो कि केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा इस वर्ष ही करीब दस निजी बैंकों को अन्य बैंकों में विलय का फैसला लिया गया है.
बैंकर्स की मुख्य मांगें: बैंकों का विलय बंद करने, बैंकिंग सुधार, ऋणियों पर कार्रवाई, दंडात्मक शुल्क लगाकर ग्राहकों को प्रताडित न करने, सेवा शुल्कों में वृद्धि न हो, जमा राशि पर ब्याज बढ़ाने, नौकरियों की सुरक्षा एवं बैंकों में नये वैकेंसी आदि शामिल हैं.
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