बांका : जिले भर में करीब एक पखवारे से कड़ाके की ठंड जारी है. साथ ही जारी शीतलहर व पछुआ हवा ने ठंड को और भी चरम पर पहुंचा दिया है. इस वर्ष ठंड पिछले तीन वर्षों का रिकार्ड तोड़ दिया. इसको लेकर इस बार बाजारों में कंबल व ऊनी वस्त्रों की बिक्री जोरों पर रही. वर्तमान में बाजारों से लगभग कंबल गायब हो चुके हैं.
ठंड के मौसम में गर्म वस्त्रों के कारोबार की बात की जाये, तो अन्य वर्षों की तुलना में इस वर्ष का कारोबार बेहतर रहा. कारोबारियों की मानें तो पिछले वर्ष ठंड के मौसम में सौ कंबल की भी बिक्री नहीं हो सकी थी. वही इस बार ठंड में करीब एक हजार से ज्यादा कंबलों की बिक्री अब तक हो चुकी है. दुकानों से निम्न व मध्यम क्वालिटी के कंबल लगभग समाप्ति की ओर है. जबकि उच्च क्वालिटी के कंबल अब भी मौजूद है.
कहते है शहर के व्यवसायी
शहर के व्यवसायी श्याम सुंदर अग्रवाल, अजु भुवानिया, अनिल कुमार डोकानियां, राजेश कुमार, संजय कुमार, अनुपम गर्ग, रमण कुमार, चिंटू कुमार आदि ने बताया कि कई वर्षों के बाद इस बार भीषण ठंड की वजह से कंबल व ऊनी वस्त्रों की बिक्री जबरदस्त हुई. जहां पिछले तीन वर्षों से सौ कंबल बेचना एक दुकानदार के लिए मुश्किल होता था. वही इस वर्ष लगभग दुकानदारों के द्वारा तीन सौ से ज्यादा कंबलों की बिक्री की गयी है. वही कुछ दुकानदारों ने बताया कि दुकान में विगत वर्षों का बचा हुआ कंबल भी इस वर्ष बिक गया. कंबल बिक्री में सबसे अधिक मध्यम मूल्य के कंबल की बिक्री हुई. निम्न क्वालिटी की बिक्री बहुत ही कम रही. वही उच्च क्वालिटी के कंबल की बिक्री में जीएसटी बाधक बना रहा.
उच्च क्वालिटी के कंबल की बिक्री में जीएसटी बन रहा है बाधक
सरकार के द्वारा विभिन्न तरह के कारोबार करने के लिए अलग-अलग स्लेब में जीएसटी तय की गयी है. जिसके कारण ब्रांडेड कंपनी के कंबल बिक्री पर जीएसटी बाधक बना हुआ है. पूर्व में वस्त्र के कारोबार पर किसी भी प्रकार का कर नही लगता था. वही जीएसटी लागू हो जाने के बाद कपड़े में चार से लेकर 18 प्रतिशत तक जीएसटी लगाया गया है. ऊनी कपड़ों में पांच प्रतिशत व दरी पर 18 प्रतिशत लगाया गया. इसके बाद कपड़ा दुकानदारों व व्यापारियों के द्वारा जीएसटी का विरोध करने के बाद दरी में लगायी गयी जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 13 प्रतिशत किया. ब्रांडेड ऊनी वस्त्र व कंबलों पर जीएसटी का मार देखा गया. जिसके कारण कंपनी के द्वारा कंबल की खरीदारी पर छूट कम कर दिया गया. लेकिन खरीदार जीएसटी के पूर्व के छूट की ही मांग जीएसटी के बाद दुकानदारों से कर रहे है. जिस कारण ब्रांडेड ऊनी वस्त्र की बिक्री घटी है.
गोयठा जला कर बिताते हैं रात
बांका. जिले की आबादी करीब 22 लाख है. जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों में सप्ताहिक हाट बाजार भी लगता है. लेकिन जिले में चल रही भीषण शीतलहरी के बीच इन हाट बाजारों में भी ग्रामीण इलाके के गरीब परिवारों को कंबल ढुंढ़ते नहीं मिल रहा है. विगत कई वर्षों के बाद इस बार की ठंड ने लोगों का हाढ़ कपकपा दिया है. धान बेचकर कई गरीब 200-300 रुपया में कंबल खरीदने बाजार सहित हाट जरूर जा रहे हैं. लेकिन इन गरीबों को इतनी कीमत में कंबल नसीब नहीं हो रहा है.
कपड़ा के खुदरा विक्रेता मो. सुजायत अली, रमण कुमार, चिंटु कुमार, मनोज सिंह आदि बताते हैं कि कम दाम की कंबल बाजार से ब्लैक आउट हो गयी है. थोक विक्रेता के यहां भी कंबल नहीं है. ऐसे में कम कीमत की कंबल इन दिनों बाजार में नहीं के बराबर मिल रही है. उधर गरीब परिवारों की मानें तो भीषण ठंड में रात गुजारना मुश्किल हो रही है. छोटे बच्चे और बुजुर्गों की हालत बेदम हो चुकी है. रात में गोयठा का अलाव बनाकर किसी तरह रात गुजार रहे हैं. लोगों ने कहा है कि ऐसी ठंड वर्षों बाद देखने को मिल रही है. वहीं हाट बाजारों में भी कंबल नहीं मिलने से धान की पुआल ओढ़ कर रात गुजारना पड़ रहा है.