साहित्यकारों ने अपनी रचना के माध्यम से दिया संदेश

Published by : SUDHIR KUMAR SINGH Updated At : 14 Sep 2025 4:48 PM

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हिंदी दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन, कई कवि व साहित्यकार हुए शामिल

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हिंदी दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन, कई कवि व साहित्यकार हुए शामिल प्रतिनिधि, औरंगाबाद शहर. अधिवक्ता संघ के सभागार में रविवार को हिंदी दिवस समारोह के अंतर्गत कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. जनेश्वर विकास केंद्र, साहित्य संवाद और महोत्सव परिवार के तत्वाधान में संयुक्त रूप से आयोजित कवि सम्मेलन का उद्घाटन साहित्य संवाद के अध्यक्ष लालदेव प्रसाद, जनेश्वर विकास केंद्र के अध्यक्ष रामजी सिंह, सिद्धेश्वर विद्यार्थी, वरिष्ठ कवि लवकुश प्रसाद, कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव, वरिष्ठ कवि अनुज बेचैन, वरिष्ठ हास्य कवि विनय मामूली बुद्धि, कवि धर्मेंद्र कुमार, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह, शिक्षिका सुमन लता ने दीप जलाकर किया. अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार व कवि रामकिशोर प्रसाद ने की. कवि सम्मेलन की शुरुआत करते हुए अजय पाल ने अपनी कविता पाठ से लोगों को भावुक कर दिया. यह रोने वाली कविताओं पर हंसने वाले हंसते हैं, दारू और पीने वाले, जुआ खेलने वाले को आज की दुनिया पूछती है. सत्य मार्ग पर चलने वाले को लोग दुनिया पागल समझती है. लवकुश प्रसाद ने अपने काव्य पाठ से हिंदी के महत्व को बताया. तड़प रही है हिन्दी भाषा हिंदी बहुरानी है. धर्मेंद्र कुमार ने मगहिया काव्य पाठ से लोगों की तालियां बटोरीं. सजनवा हो मीठी-मीठी बतिया करू रचना पेश किये. अनुज बेचैन ने अपने काव्य पाठ में कहा कि त्रेता युग से इस कलयुग तक भाषा का संसार है. हिंदी भाषा ही राष्ट्र की पहचान है. वरिष्ठ हास्य कवि विनय मामूली बुद्धि ने अपने काव्य पाठ से संदेश दिया. रामकिशोर प्रसाद ने जहां की हिंदी की अपनी अलग पहचान है, यही तो हमारी राष्ट्र की हिंदी भाषा शान है रचना पेश की. अधिवक्ता संजय सिंह ने भी अपने काव्य पाठ के माध्यम से पूरा परिसर को देशभक्ति माहौल में डूबो दिया. कितना जोर लगाइबा बाकी कश्मीर न मिली को काफी सराहा गया. कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए साहित्यकार हेरंब मिश्रा ने अपने काव्य पाठ से लोगों की खूब तालियां बटोरीं. समाज के बीच चेतना जगाते हैं कवि सिदेश्वर विद्यार्थी व आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि विशेष रूप से हिंदी भाषा के उपयोग और महत्व को बढ़ाने के लिए कवि सम्मेलन एक महत्वपूर्ण माध्यम है. कवियों द्वारा अपने इतिहास को जानने का अवसर मिलता है. कवि अपने काव्य पाठ से समाज के बीच एक चेतना जगाने का काम करते हैं. कवि सम्मेलन वह माध्यम है, जो रिश्ते के प्रेम संबंध को जोड़ता है. पक्ष हो या विपक्ष हो, सभी लोगों को एक साथ हंसाने को मजबूर कर देता है. इस मौके पर प्रो राजेंद्र सिंह, अधिवक्ता अनिल सिंह, उज्ज्वल रंजन, बाल कवि सुशांत कुमार, प्रशांत कुमार, इं धीरेंद्र सिंह, वीरेंद्र गुप्ता, अरुण सिंह समेत अन्य कई लोग मौजूद रहे.

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