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कबीर दास के विचार आज के समाज में अत्यंत ही प्रासंगिक

Updated at : 11 Jun 2025 4:00 PM (IST)
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कबीर दास के विचार आज के समाज में अत्यंत ही प्रासंगिक

सदर प्रखंड स्थित ग्राम जम्होर में जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन औरंगाबाद के तत्वावधान में भारत के महान संत कवि भक्ति काल के निर्गुण शाखा के प्रवर्तक कवि कबीर दास की 627वीं जयंती समारोह के अवसर पर एक विचारगोष्ठी आयोजित की गयी

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औरंगाबाद ग्रामीण. सदर प्रखंड स्थित ग्राम जम्होर में जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन औरंगाबाद के तत्वावधान में भारत के महान संत कवि भक्ति काल के निर्गुण शाखा के प्रवर्तक कवि कबीर दास की 627वीं जयंती समारोह के अवसर पर एक विचारगोष्ठी आयोजित की गयी. जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, उपाध्यक्ष डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, महामंत्री धनंजय जयपुरी सहित अन्य लोगों ने कबीर दास के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किया. विधायक प्रतिनिधि प्रदीप कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कबीर के विचार आज के समाज में अत्यंत प्रासंगिक विषय पर अपने वक्तव्य में संस्था के जिला उपाध्यक्ष सुरेश विद्यार्थी ने कहा कि कबीर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं. भक्ति काल जब झंझावात के दौर से गुजर रहा था तो भक्ति आंदोलन के दौर में कबीर दास का अवतरण हुआ और सनातनी परंपरा में जो आडंबर थे, उनको उन्होंने दूर करने का प्रयास किया और एक स्वच्छ समन्वयवादी समाज की स्थापना कर सभी विचारधाराओं को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया था. सामाजिक एकता के पर्याय कबीर की रचनाओं में ऐसी कोई विचारधारा नहीं है, जिसका उन्होंने समावेश नहीं किया हो. चाहे पाश्चात्य दर्शन के बड़े दार्शनिकों की विचारधारा हो या फिर पूर्वी विद्वानों के विचारधारा दोनों ही विचारधाराओं का समन्वय स्वरूप कबीर ने कराया था. कबीर साखी, कबीर बीजक, कबीर शब्दावली, कबीर दोहावली कबीर ग्रंथावली जैसी रचना उनकी पृष्ठभूमि वाली रचना है, जो भक्तिकालीन साहित्य के आधारभूत ग्रंथ माने जाते हैं. हिंदी साहित्य के इतिहास में भक्ति काल को स्वर्ण युग माना जाता है. उसे स्वर्ण युग बनाने में कबीर का अप्रतिम स्थान रहा है. वर्तमान समय में जिस तरह के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक परिवेश की धारा चल पड़ी है, उन धाराओं में कबीर की विचारधारा ही सही बैठती है. आज जिस तरह से कमजोर दबे पिछड़े लोग भी समाज के अग्रिम पंक्ति में हैं, उनके केंद्र में संत कवि शिरोमणि कबीर दास का ही विचारधारा का स्थान सर्वोपरि है. मौके पर जगन सिंह, विक्की प्रसाद गुप्ता, जम्होर के स्वच्छता पर्यवेक्षक नंद जी यादव आदि उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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