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मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों का अपना महत्व

Updated at : 23 Sep 2025 6:32 PM (IST)
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मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों का अपना महत्व

भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाता है शारदीय नवरात्र

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भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाता है शारदीय नवरात्र

औरंगाबाद/कुटुंबा. शारदीय नवरात्र भारतीय संस्कृति के धार्मिक व आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाता है. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए शक्ति स्वरूपा दुर्गा की अराधना की थी. सनातन धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व है. यह आत्मिक व मानसिक शुद्धता का त्योहार है. इसमें शारदीय नवरात्र का बहुत ही विशिष्ट स्थान है. ज्योतिर्विद डॉ हेरम्ब कुमार मिश्र ने बताया कि यह केवल धार्मिक ही नहीं अपितु आत्मिक व मानसिक शुद्धता का भी त्योहार है. उन्होंने बताया कि ऐसे वर्ष में चार बार नवरात्र मनायी जाती है. हिन्दी नववर्ष शुरूआत के साथ चैत्र शुक्लपक्ष की वासंतिक नवरात्र व आश्विन शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्र को लोग बहुत धूमधाम से मनाते हैं. वहीं, आषाढ़ और माघ महीने की नवरात्र गुप्त मानी गयी है. इन्हें मंत्र एवं तंत्र साधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है.

दुर्गा मां की भक्ति पूर्वक उपासना का महत्व

ज्योतिर्विद डॉ मिश्र ने बताया कि ऐसे तो धार्मिक दृष्टिकोण से सनातन संस्कृति में सभी पर्व त्योहार का अलग-अलग महत्व रहा है. खासकर शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की भक्तिपूर्वक उपासना की जाती है. इस दौरान बहुत से श्रद्धालु भगवान श्रीराम की भी भक्तिपूर्वक आराधना करते हैं. इनकी आराधना से जहां बुराइयों से लड़ने की ताकत मिलती हैं, वहीं प्रभु श्री राम की आराधना से सत्य, धर्म, कर्तव्य और निष्ठा के साथ जीवन जीने की कला को आधार मिलता है. शारदीय नवरात्र की उपासना से संकटों का सामना करने के लिए आत्मविश्वास में वृद्धि होती है.

दुर्गा सप्तशती पाठ से भक्तिमय हुआ वातावरण

शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना के साथ सोमवार से दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू होते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है. देवी मंदिर से लेकर पूजा पंडालों व श्रद्धालुओ के घर में वैदिक मंत्र गूंज रहा है. ज्योतिर्विद ने बताया कि इस दौरान लगातार नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है. प्रथम दिन शैलपुत्री की आराधना से नवरात्रि आरंभ होती है. माता शैलपुत्री पर्वतराज हिमाचल की पुत्री हैं जिनके रूप में प्रकृति की महिमा और स्थिरता छिपी है. ब्रह्मचारिणी माता का रूप साधना और तपस्या का प्रतीक है. माता चंद्रघंटा की आराधना पाप, कष्ट, मानसिक वेदनाओं और भूत प्रेत की बाधाओं को समाप्त करती है. कुष्मांडा देवी की आराधना आदिशक्ति के रूप में जानी जाती है. सृष्टि की रचना इन्होंने ही की थी. इनकी कृपा से सभी तरह के कल्याण होते हैं. स्कन्दमाता कार्तिकेय जी की मां हैं. कार्तिकेय जी को स्कंद भी कहा जाता है. सिंह पर सवार चतुर्भुजधारी स्कंदमाता की कृपा से जीवन में सफलता मिलती है. कात्यायन ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर माता दुर्गा ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया था. माता का वही रूप कात्यायनी का है, जो समस्याओं एवं बाधाओं से रक्षा करती हैं. कालरात्रि माता दुर्गा का क्रूर और भयंकर रूप है,जो अज्ञान और अहंकार का नाश करने वाली हैं. यह सभी तरह की बुराइयों को अंत करती हैं. देवी का महागौरी स्वरूप अत्यंत श्वेत और निर्मल है.इन्हें शांति और करुणा का प्रतीक माना जाता है. माता सिद्धिदात्री की आराधना के साथ नवरात्रि का अनुष्ठान पूर्ण होता है. इनकी कृपा से श्रद्धालुओं को सिद्धियां प्राप्त होती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. भगवान शिव ने शक्ति के इसी स्वरूप की उपासना कर सिद्धियां प्राप्त की थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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