औरंगाबाद में बिना रास्ते का स्कूल, 141 बच्चों की पढ़ाई कीचड़ के भरोसे, खेतों से होकर पहुंचते हैं छात्र और शिक्षक

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विद्यालय बना, पर रास्ता नहीं—कीचड़ भरे खेतों से होकर पढ़ने जाते हैं नौनिहाल

इसी रास्ते से विद्यालय जाते हैं बच्चे

Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के एक प्राथमिक विद्यालय की जर्जर स्थिति शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल उठा रही है. 141 बच्चों और शिक्षकों को खेतों से होकर कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल पहुंचना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

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Aurangabad News: बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के दावे कर रही है, लेकिन औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड की दक्षिणी उमंगा पंचायत स्थित वकीलगंज प्राथमिक विद्यालय की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है. विद्यालय भवन का निर्माण वर्षों पहले हो चुका है, लेकिन आज तक वहां पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं बन पाया है.

विद्यालय जाने के लिए बच्चों और शिक्षकों को खेतों के बीच बने कीचड़ भरे पगडंडी रास्ते का सहारा लेना पड़ता है. बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है.

बारिश में बढ़ जाती है परेशानी

बरसात के मौसम में विद्यालय तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है. छोटे-छोटे बच्चे अक्सर फिसलकर कीचड़ में गिर जाते हैं, जबकि कई बार शिक्षक भी दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं. खराब रास्ते के कारण कई विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति भी प्रभावित होती है.

2009 में बना भवन, लेकिन आज तक नहीं बना रास्ता

विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार वर्ष 2006 में स्कूल की स्वीकृति मिली थी और वर्ष 2009 में भवन का निर्माण पूरा हो गया था. इसके बावजूद आज तक विद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क या पक्का रास्ता नहीं बनाया गया.

वर्तमान में विद्यालय में 141 विद्यार्थियों का नामांकन है. यहां पांच शिक्षक और चार शिक्षा सेवक कार्यरत हैं.

कई गांवों के बच्चे आते हैं पढ़ने

वकीलगंज प्राथमिक विद्यालय में वकीलगंज, लालटेनगंज, भगवानपुर, राजकुमार डेरा और रामराज्य बीघा सहित कई गांवों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं. यह इलाका पहले नक्सल प्रभावित रहा है, लेकिन अब यहां के लोग शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं. इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी बच्चों की पढ़ाई में बड़ी बाधा बनी हुई है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना बेहद कठिन हो जाता है. कई बच्चे रास्ते में फिसलकर गिर जाते हैं और कीचड़ से सने हुए घर लौटते हैं.

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब विद्यालय तक पहुंचने के लिए रास्ता ही उपलब्ध नहीं था, तो भवन निर्माण की स्वीकृति कैसे दी गई. उन्होंने प्रशासन से जल्द पक्का रास्ता बनाने की मांग की है.

प्राचार्य ने बताई शिक्षकों की परेशानी

विद्यालय के प्राचार्य मोहम्मद परवेज ने बताया कि बारिश के मौसम में शिक्षक अपनी बाइक मुख्य सड़क पर खड़ी कर पैदल खेतों की पगडंडी से विद्यालय पहुंचते हैं. कई बार फिसलकर गिरने की घटनाएं भी हो चुकी हैं.

उन्होंने कहा कि सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों को होती है, जिन्हें रोजाना इस कठिन रास्ते से होकर विद्यालय आना पड़ता है.

निर्माण प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल

जानकारी के अनुसार, किसी भी सरकारी भवन के निर्माण से पहले संबंधित जमीन के लिए अंचल कार्यालय से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना आवश्यक होता है. इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि भवन तक पहुंचने के लिए रास्ता उपलब्ध है.

ऐसे में इस विद्यालय के निर्माण के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

ग्रामीणों ने जल्द समाधान की मांग की

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी बच्चों के भविष्य पर असर डाल रही है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय तक जल्द पक्का रास्ता बनाया जाए, ताकि छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके.


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Vinay Singh

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By Vinay Singh

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