औरंगाबाद सदर अस्पताल में अर्थोसर्जन के अभाव में पक्का प्लास्टर बंद, मरीजों को निजी क्लीनिकों का सहारा

सदर अस्पताल में मरीज का कच्चा प्लास्टर करते स्टाफ नर्स | Prabhat Khabar Network
औरंगाबाद सदर अस्पताल में हड्डी रोग की सुविधा ठप पड़ने से मरीजों को भारी परेशानी हो रही है. विशेषज्ञ न होने के कारण पक्का प्लास्टर नहीं हो पा रहा, जिससे गरीबों को निजी क्लीनिकों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है.
Aurangabad News: मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किए जा रहे औरंगाबाद जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में इन दिनों हड्डी रोग से संबंधित मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सदर अस्पताल में पिछले कई दिनों से कास्ट यानी पक्का प्लास्टर करने की महत्वपूर्ण सुविधा पूरी तरह बंद पड़ी है. इसका मुख्य कारण अस्पताल में किसी भी अर्थोसर्जन (हड्डी रोग विशेषज्ञ) का तैनात नहीं होना बताया जा रहा है. ऐसे में हाथ-पैर में फ्रैक्चर होने के बाद सदर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को फिलहाल सिर्फ कच्चा प्लास्टर ही कर के छोड़ दिया जा रहा है.
बाहर जाने की मजबूरी
औरंगाबाद के इस मुख्य सरकारी अस्पताल में पक्का प्लास्टर कराने की सुविधा नहीं होने के कारण लाचार मरीजों को या तो मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, गयाजी का रुख करना पड़ रहा है या फिर शहर के महंगे निजी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है. बड़ी बात यह है कि कुछ समय पहले तक सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड स्थित माइनर ओटी में कच्चे प्लास्टर के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर कास्ट की सुविधा भी आसानी से उपलब्ध थी जिससे मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी.
विशेषज्ञों का टोटा बरकरार
औरंगाबाद सदर अस्पताल में लंबे समय तक हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में बेहतरीन सेवा देने वाले डॉ. विकास कुमार सिंह के यहाँ से जाने के बाद डॉक्टरों की भारी कमी हो गई है. उनके जाने के बाद विभाग द्वारा दो नए डॉक्टरों की नियुक्ति सदर अस्पताल में की गयी थी, लेकिन किसी कारणवश दोनों डॉक्टरों ने भी अपनी सेवा जारी नहीं रखी. इसके बाद से ही अस्पताल में अर्थोसर्जन का पद लगातार खाली पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप सुदूर ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब हड्डी के मरीजों को मिलने वाली यह महत्वपूर्ण सुविधा प्रभावित हो गयी है.
निजी अस्पतालों की मनमानी
औरंगाबाद सदर अस्पताल में कास्ट की सुविधा बंद होने का सीधा और प्रतिकूल असर गरीब मरीजों की जेब पर पड़ रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेने को विवश हैं जहाँ उनसे मनमानी राशि वसूली जा रही है. सिमरा निवासी पीड़ित मुकेश ने बताया कि हाथ फ्रैक्चर होने के बाद वे सदर अस्पताल पहुंचे थे, जहाँ चिकित्सकों ने कच्चा प्लास्टर तो कर दिया लेकिन पक्का प्लास्टर के लिए उन्हें बाहर जाने को कह दिया गया. इस कमी के कारण मरीजों को भारी आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है.
सामान उपलब्ध डॉक्टर गायब
औरंगाबाद सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला ने इस गंभीर समस्या के संबंध में तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि कास्ट के लिए आवश्यक सभी प्रकार की सामग्रियां और मेडिकल किट अस्पताल में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं. लेकिन विशेषज्ञ अर्थोसर्जन नहीं होने के कारण नियमों के मुताबिक कास्ट नहीं किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस विकट समस्या की लिखित जानकारी विभाग के वरीय अधिकारियों को भी दी गयी है और अर्थोसर्जन की नई नियुक्ति होने के बाद ही यह सुविधा दोबारा सुचारू रूप से बहाल हो सकेगी.
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