Aurangabad News : सदर अस्पताल के भर्ती महिला बनी अस्पताल प्रबंधन के लिए चुनौती

Updated at : 25 Feb 2025 10:44 PM (IST)
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Aurangabad News : सदर अस्पताल के भर्ती महिला बनी अस्पताल प्रबंधन के लिए चुनौती

Aurangabad News:अन्य मरीजों की परेशानी को देखते हुए पीएमसीएच भेजने की तैयारी

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औरंगाबाद ग्रामीण.

सदर अस्पताल के महिला वार्ड में एक माह से एक महिला भर्ती है. उसकी पहचान होने के बाद भी परिजन हाल जानने नहीं पहुंचे. कुछ लोगों से जानकारी मिली कि उसके बाल-बच्चे नहीं है और पति की भी मौत हो गयी है. गांव में रिश्तेदार हैं, लेकिन सभी ने उससे किनारा कर लिया है. महिला सदर अस्पताल के नर्सों की सेवा से अभी तक जीवित है. महिला ने बताया कि उसे एक वाहन ने टक्कर मार दिया था. मार्शल चालक ही उसे भर्ती कराकर चला गया. उसे देखने परिवार का कोई सदस्य नहीं आया. इलाजरत महिला अपना नाम सीता देवी और घर देव के कचनपुर गांव बताती है. महिला चलने में असमर्थ है, जिसके कारण अस्पताल के बेड पर ही शौच तक कर देती है. अब उसके शरीर से बदबू आने लगी है, जिसको लेकर वहां भर्ती मरीजों द्वारा उसे कही अन्यत्र व्यवस्थित करने का दबाव अस्पताल प्रबंधन पर बनाया जा रहा है. बदबू के कारण उस वार्ड में कोई मरीज रहना नहीं चाहता. सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ सुरेंद्र कुमार सिंह से बात की य तो उन्होंने बताया कि वार्ड में भर्ती मरीज द्वारा लगातार उक्त महिला को अन्यत्र शिफ्ट करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसको लेकर सिविल सर्जन से बात की गई और उसे पीएमसीएच के अज्ञात वार्ड भेजने की तैयारी की जा रही है. उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी जिला पदाधिकारी एवं एसपी को दी जा रही है तथा नगर थानाध्यक्ष से भी बात कर महिला को पीएमसीएच तक पहुंचाने के लिए दो कांस्टेबल की मांग की गयी है. ताकि महिला को वहां सुरक्षित भर्ती कराया जा सके. उन्होंने बताया कि संभवतः कुछ घंटे बाद ही महिला को एंबुलेंस से पीएमसीएच भेज दिया जायेगा.

आखिर पहले ही क्यों नहीं किया गया रेफर

सदर अस्पताल में एक माह से इलाजरत सीता देवी की तबीयत जब अधिक खराब है तो उसे पहले ही क्यों नहीं रेफर किया गया. अच्छे अस्पतालों में क्यों नहीं इलाज कराया गया. अगर उसके शरीर से बदबू आ रही है और चल-फिर नहीं रही है, तो समझा जा सकता है कि उसकी हालत गंभीर है. फिर इतने दिनों तक सदर अस्पताल में रखने का औचित्य ही समझ से बाहर है. सूत्रों से जानकारी मिली कि महिला को किसी दूसरे अस्पताल में भेजने की जहमत अधिकारी उठाना ही नहीं चाहते थे. ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले सदर अस्पताल के दो मरीजों को बारुण के एक क्षेत्र में फेंकवाये जाने और फिर एक की मौत होने के बाद अस्पताल की कुव्यवस्था सुर्खियों में आ गयी थी. तत्कालीन डीएस सहित कुछ लोगों पर कार्रवाई भी हुई. ऐसे में दूसरी घटना न हो इस वजह से प्रबंधन ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया.

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