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Aurangabad News : नाली के गंदे पानी में खड़े होकर जताया विरोध

Updated at : 15 Jan 2026 10:08 PM (IST)
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Aurangabad News : नाली के गंदे पानी में खड़े होकर जताया विरोध

Aurangabad News: जलजमाव का नहीं हो सका समाधान, फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, पंचायत चुनाव बहिष्कार का एलान

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गोह/हसपुरा. हसपुरा प्रखंड के डुमरा पंचायत अंतर्गत वार्ड चार स्थित महुली गांव के डीह पासवान टोला में गुरुवार को हालात उस वक्त गंभीर हो गये जब दर्जनों महिला व पुरुष ग्रामीण नाली के गंदे और बदबूदार पानी में खड़े होकर प्रदर्शन करने लगे. आक्रोशित लोगों ने जनप्रतिनिधियों व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. इसी बीच ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव बहिष्कार का एलान कर दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि करीब 20 वर्षों से वे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है. प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डीह पासवान टोला एससी-एसटी बहुल इलाका है, इसी कारण जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन तक उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है. उनका कहना है कि अन्य टोले में सड़क और नाली की व्यवस्था कर दी गयी, लेकिन उनके टोले को जानबूझकर उपेक्षित रखा गया. इसी भेदभाव का नतीजा है कि दो दशक बीत जाने के बाद भी वे गंदे नाली के पानी से होकर आने-जाने को मजबूर हैं. प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि पंचायत चुनाव से पहले नाली के पानी की निकासी और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे सामूहिक रूप से पंचायत चुनाव का बहिष्कार करेंगे. ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ विकास का सवाल नहीं, बल्कि उनके सम्मान, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है.

नाली के पानी से होकर स्कूल जाते हैं बच्चे

ग्रामीणों के अनुसार टोला में प्रवेश का एकमात्र रास्ता नाली से होकर गुजरता है, जहां हर समय लगभग दो फीट तक गंदा पानी जमा रहता है. इसी पानी से होकर मासूम बच्चे स्कूल जाते हैं, महिलाएं पूजा-पाठ के लिए निकलती हैं और बुजुर्ग रोजमर्रा के काम से बाहर जाते हैं. बदबूदार पानी के कारण लोग अक्सर बीमार पड़ जाते हैं, जिससे आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ रही है.

20 वर्षों से जस की तस बनी है स्थिति

डीह पासवान टोला में करीब साढ़े चार सौ घर हैं और लगभग नौ सौ मतदाता रहते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि 20 वर्षों में कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगायी गयी, आवेदन दिये गये, लेकिन आज तक न तो नाली के पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था की गयी और न ही पक्की सड़क का निर्माण हुआ. हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला.

चुनाव आते ही याद आता है गांव

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हर चुनाव के समय नेताओं की टोली गांव में पहुंचती है, वादों की झड़ी लगती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव में दोबारा कोई झांकने तक नहीं आता. यही वजह है कि अब ग्रामीणों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है.

ग्रामीणों ने खुलकर रखी बात

श्रीकांत पासवान ने कहा कि 20 वर्षों से हम लोग नाली के गंदे पानी से होकर आने-जाने को मजबूर हैं. कई बार शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. चुनाव के समय नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं. जीतने पर देखने तक नहीं आते. गृहिणी रजानती देवी ने कहा कि महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं. पूजा-पाठ, बाजार या अस्पताल जाने के लिए गंदे पानी में घुसना पड़ता है. बच्चों के साथ निकलते समय डर लगा रहता है कि कहीं फिसल न जाये. हम लोग भी इंसान हैं. ब्रह्मदेव पासवान ने आरोप लगाया कि यह टोला एससी-एसटी का है, इसलिए जानबूझकर उपेक्षा की जा रही है. आसपास के इलाकों में सड़क और नाली बन गयी, लेकिन हमारे हिस्से में सिर्फ आश्वासन आया. अब हम चुप नहीं बैठेंगे. गृहिणी राधा देवी ने कहा कि बरसात में हालत काफी खराब हो जाती है. नाली का पानी घरों तक घुस जाता है. बच्चे बीमार पड़ जाते हैं, मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है. कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया. रिंकू कुमारी ने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज नाली में उतरकर जाना पड़ता है. उनके कपड़े, जूते और किताबें खराब हो जाती हैं. कई बार बच्चे गिर भी जाते हैं. पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन को फर्क नहीं पड़ता. ललिता देवी ने कहा कि जब मेहमान आते हैं तो शर्म महसूस होती है. गांव में घुसते ही गंदा पानी और बदबू झेलनी पड़ती है. बीमार लोगों को चारपाई पर उठाकर ले जाना पड़ता है. यह स्थिति अब बर्दाश्त के बाहर हो चुकी है. ओम प्रकाश कुमार ने कहा कि हम लोग टैक्स भी देते हैं और वोट भी डालते हैं, फिर भी हमें बुनियादी सुविधा से वंचित रखा गया है. 20 साल में अगर नाली का पानी नहीं निकल सका. समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा. रामप्रवेश पासवान ने कहा कि चुनाव आते ही बड़े-बड़े वादे किये जाते हैं. कहा जाता है कि जल्द समस्या दूर होगी, लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं. अब पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर प्रशासन को जगाने का फैसला लिया गया है. उदय पासवान ने कहा कि यह सिर्फ सड़क या नाली की समस्या नहीं हमारे सम्मान व जीवन से जुड़ा मामला है. जब बच्चे नाली में उतरकर स्कूल जाएं, तो इससे बड़ी बदहाली क्या होगी. अब हम जिला स्तर पर आंदोलन करेंगे. रामाधार प्रसाद ने कहा कि इतने वर्षों से नारकीय जीवन जीने के बाद अब सब्र टूट चुका है. प्रशासन अगर हमें मजबूर समझ रहा है, तो यह उसकी भूल है. हम शांतिपूर्वक अपनी मांग रख रहे हैं, जरूरत पड़ी तो संघर्ष किया जायेगा.

पंचायत स्तर के फंड से इस समस्या का समाधान संभव नहीं : बीडीओ

प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रदीप कुमार चौधरी ने बताया कि डीह पासवान टोला की समस्या की जानकारी उन्हें मिल चुकी है और वे स्वयं स्थल का जायजा भी ले चुके हैं. उन्होंने कहा कि यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है और इसकी गंभीरता को प्रशासन समझता है. पंचायत स्तर के फंड से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है, क्योंकि कार्य का दायरा बड़ा है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी उपयुक्त योजना या विभागीय फंड से इसका समाधान किया जायेगा. प्रशासन इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर चुका है. बहुत जल्द ही ग्रामीणों को राहत देने का प्रयास किया जायेगा.

जल्द ही जांच कराकर तैयार करायी जायेगी रूपरेखा : विधायक

गोह विधायक अमरेंद्र कुमार ने कहा कि डीह पासवान टोला के ग्रामीणों की समस्या पूरी तरह जायज है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने बताया कि सड़क और नाली से जुड़ी यह समस्या बुनियादी सुविधा से संबंधित है. उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों से बातचीत की है. जल्द ही तकनीकी जांच कराकर कार्य की रूपरेखा तैयार कराई जायेगी. उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि किसी भी हाल में समस्या का स्थायी समाधान कराया जायेगा. साथ ही उन्होंने लोगों से शांति बनाये रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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