औरंगाबाद कार्यालय. सड़क सुरक्षा माह के तहत औरंगाबाद में परिवहन विभाग ने यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अनोखा और सराहनीय रोको-टोको अभियान चलाया. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बाइक चालकों को हेलमेट पहनने और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना था. अभियान के दौरान दंडात्मक कार्रवाई की जगह सकारात्मक संदेश और सम्मान के माध्यम से लोगों को नियमों की अहमियत समझायी गयी. शहर के परिवहन कार्यालय के समीप चलाये गये इस अभियान में परिवहन विभाग की टीम ने बाइक चालकों को रोका और उनके हेलमेट के उपयोग की स्थिति के आधार पर उन्हें अलग-अलग तरीके से सम्मानित किया. जिन बाइक चालकों ने हेलमेट नहीं पहना था, उन्हें माला पहनाकर और फूल देकर सम्मानित किया गया. वहीं, जो बाइक चालक नियमों का पालन करते हुए हेलमेट पहनकर चल रहे थे, उन्हें माला के साथ टॉफी देकर सम्मानित किया गया. यह दृश्य राहगीरों और अन्य वाहन चालकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा. अभियान के दौरान बिना हेलमेट पकड़े गये कई बाइक चालकों ने सार्वजनिक रूप से ग्लानि और शर्मिंदगी महसूस की. उन्हें मौके पर ही हेलमेट पहनने वाले चालकों से सीख लेने और भविष्य में नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया. परिवहन विभाग की इस पहल का असर यह दिखा कि कई लोगों ने तत्काल हेलमेट खरीदने और नियमित रूप से पहनने का संकल्प लिया. अभियान में एडीटीओ संतोष सिंह, एमवीआई नंदन राज, सुजिता कुमारी, ईएसआई गौरव पांडेय, आशीष कुमार, हितेष कुमार, आशा कुमारी और प्रधान सहायक उत्तम कुमार आदि शामिल थे.
जीवन की सुरक्षा का मजबूत कवच है हेलमेट : सुनंदा
अभियान का नेतृत्व कर रही जिला परिवहन पदाधिकारी सुनंदा कुमारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा सप्ताह का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं है, बल्कि लोगों को यातायात नियमों के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाना है. उन्होंने कहा कि रोको-टोको अभियान के माध्यम से बाइक चालकों को सरल और सकारात्मक तरीके से यह समझाना चाहते हैं कि हेलमेट पहनना कानून का डर नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच है. एक छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है. सुनंदा कुमारी ने बताया कि दोपहिया वाहन चालकों में सड़क दुर्घटनाओं का प्रतिशत काफी अधिक है, जिसका मुख्य कारण हेलमेट न पहनना और तेज रफ्तार है. यदि हर बाइक चालक हेलमेट पहनने की आदत बना ले, तो दुर्घटना में होने वाली गंभीर चोटों और मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे जागरूकता अभियान आगे भी लगातार चलाये जायेंगे. जरूरत पड़ने पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी, लेकिन प्राथमिकता लोगों को समझाने और सुरक्षित यातायात संस्कृति विकसित करने की है.
अभियान को लोगों ने सराहा
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने इस अभियान की सराहना की. उनका कहना था कि सम्मान और सकारात्मक संदेश के जरिये दी गयी सीख ज्यादा असरदार होती है. कुल मिलाकर, औरंगाबाद में चला यह रोको-टोको अभियान सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में एक प्रभावी और प्रेरणादायक पहल साबित हुआ.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

