Aurangabad News : चार केंद्रों पर इंटर की कॉपियों की जांच आज से

Aurangabad News: सेंटरों के पास चाक-चौबंद रहेगी सुरक्षा व्यवस्था, नियुक्ति पत्र व विरमन लेटर के साथ योगदान करेंगे परीक्षक, मोबाइल फोन पर प्रतिबंध
औरंगाबाद/अंबा. जिले के चार केंद्रों पर गुरुवार से इंटर परीक्षा की कॉपियों की जांच शुरू होगी. इसके लिए बोर्ड ने इंटर स्तरीय शिक्षण संस्थान में पदस्थापित संबंधित विषयों के अनुभवी शिक्षकों को सह परीक्षक व प्रधान परीक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त किया है. मिडिल स्कूल व प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों को एमपीपी के रूप में लगाया है. वहीं, मेकर, चेकर व सुपरवाइजर के रूप में कंप्यूटर टीचर लगाये गये है. विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में उत्तर-पुस्तिकाएं जांची जायेगी. मोबाइल फोन लेकर मूल्यांकन कक्ष में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया है. प्रशासन ने मूल्यांकन केंद्र के इर्द-गिर्द 200 गज की परिधि में धारा 144 लागू की है. अनाधिकृत व्यक्ति को केंद्र के अंदर जाने पर रोक लगा दिया गया है. विधि व्यवस्था कायम रखने के लिए दंडाधिकारी के साथ पुलिस बल की तैनाती की गयी है. अधिकारियों ने बताया कि इंटर व मैट्रिक की उत्तर पुस्तिका पूरी तरह से वारकोडेड है. मूल्यांकन के क्रम में पैरवी की गुंजाइश संभव नहीं है. किस परीक्षार्थी की कांपी है और कहां से आयी है इसकी भनक मूल्यांकन से जुड़े कर्मियों को भी नहीं लगेगी. बोर्ड ने कहा है कि मूल्यांकन के क्रम में परीक्षकों को पूरी तरह से सावधानी बरतनी होगी. उन्हें आंसर सीट में लिखित उत्तर के अनुरूप स्टेप वाइज स्टेप मार्किंग करना होगा.
शाम पांच बजे तक चलेगा मूल्यांकन का काम
मूल्यांकन के लिए शहर के एस सिन्हा कॉलेज में केंद्र बनाया गया है. इसके डायरेक्टर प्राचार्य डॉ सुधीर कुमार मिश्र बनाये गये है. वहीं आरएलएसवाइ कॉलेज सेंटर वन के डायरेक्टर बसडीहा कला के हेडमास्टर अख्तर आलम बनाये गये है. सेंटर टू के डायरेक्टर डुमरी स्कूल के प्रधानाचार्य धनंजय कुमार बनाये गये है. इधर, केएसएम कॉलेज सेंटर के डायरेक्टर कर्मा हाइस्कूल के प्रधानाचार्य जीतेंद्र कुमार यादव बनाये गये है. विभागीय निर्देशानुसार प्रतिदिन नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक उत्तर-पुस्तिकाएं जांची जायेगी. निर्धारित समय के अंदर परीक्षक या एचइ आवंटित कार्य संपन्न नहीं करते हैं, तो उन्हें उसी दिन छह बजे तक पूरा करना होगा.
एमपीपी करेंगे मार्क्स कलर
मूल्यांकन कार्य से जुड़े कर्मियों के लिए बोर्ड ने अलग-अलग कार्य के लिए जिम्मेदारी दी है. निदेशक केंद्र का संचालन करेंगे. कोऑर्डिनेटर उत्तर-पुस्तिका उप आवंटित करेंगे. एचई अपने अधिनस्थ परीक्षकों के बीच उत्तर-पुस्तिका वितरण करेंगे. वहीं, उनके द्वारा जांची गयी कापियों में से 10 प्रतिशत पुण: जांच करेंगे. इसके बाद अवार्ड सीट और मार्क्स फाईल में बने गोला कलर करने की जिम्मेदारी एमपीपी को है. प्रत्येक सेंटर पर तीन सुपरवाईजर और छह मेकर तथा छह चेकर को लगाया गया है. पहले मेकर इसके बाद चेकर जांची गयी उत्तर पुस्तिका का मार्क्स ऑनलाइन पेस्ट करेंगे. मिश मैच करने पर सुपरवाइजर दोनों का मिलान कर सुधार करेंगे.क्या बताते हैं अफसर
इस संबंध में डीपीओ दयाशकंर सिंह ने बताया कि इंटर और मैट्रिक परीक्षा का मूल्यांकन अति महत्वपूर्ण कार्य है. इसके लिए बोर्ड सख्त है. ऐसे में परीक्षकों को बहुत ही बारीकी तरीके से उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करना है. कोई प्रश्नोत्तर अमूल्यांकित नहीं रह जाये, इसके प्रति परीक्षकों को पूरी तरह से सजग रहने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि मूल्यांकन के क्रम में चाक-चौबंद प्रशासनिक व्यवस्था रहेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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