औरंगाबाद के किसान की सफलता की कहानी, अमरूद की उन्नत खेती से हर साल कमा रहे हजारों रुपये, दूसरे किसानों के लिए बने मिसाल

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ओबरा प्रखंड के कदेआही गांव स्थित अपने अमरूद के बाग में उद्यमी किसान कुमार विजय वर्मा उर्फ पिंटू, सफल बागवानी के माध्यम से अन्य किसानों को प्रेरित करते हुए। | Prabhat Khabar Network

अमरूद के बाग में उद्यमी किसान कुमार विजय वर्मा

औरंगाबाद के कुमार विजय वर्मा ने 31 डिसमिल जमीन पर अमरूद की उन्नत खेती कर अच्छी आय अर्जित की है. महज दो साल में 180 पौधों से उन्हें प्रति वर्ष 60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है. उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही है.

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औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड के कदियाही गांव के प्रगतिशील किसान एवं उद्यमी कुमार विजय वर्मा उर्फ पिंटू अमरूद की उन्नत खेती कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं. उनकी सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. आधुनिक तकनीक और मेहनत के दम पर उन्होंने बागवानी को लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया है.

31 डिसमिल जमीन पर लगाए 180 अमरूद के पौधे

कुमार विजय वर्मा ने बताया कि वर्ष 2023 में उन्होंने अपनी 31 डिसमिल निजी जमीन पर हाजीपुर से विशेष किस्म के 180 अमरूद के पौधे मंगवाकर लगाए थे. प्रत्येक पौधे की कीमत 260 रुपये थी. पौधों की खरीद, सिंचाई, खाद, देखभाल और अन्य संसाधनों पर लगभग एक लाख रुपये की लागत आई.

दो साल में मिलने लगा उत्पादन, हर वर्ष हो रहा अच्छा मुनाफा

उन्होंने बताया कि महज दो वर्षों के भीतर पौधों में फल आने लगे. वर्तमान में अमरूद की खेती से उन्हें प्रति वर्ष लगभग 60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है. उनका कहना है कि पारंपरिक धान की खेती की तुलना में बागवानी अधिक लाभदायक है और कम जमीन में भी बेहतर आमदनी दी जा सकती है.

दूसरे किसानों को भी बागवानी अपनाने की दे रहे सलाह

कुमार विजय वर्मा का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक के साथ फलों की खेती करें, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. इसी सोच के साथ वे गांव और आसपास के किसानों को भी अमरूद सहित अन्य फलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

सरकारी सहायता नहीं मिली, फिर भी मेहनत से बने आत्मनिर्भर

उन्होंने बताया कि खेती शुरू करने से पहले उन्होंने औरंगाबाद स्थित कृषि उद्यान विभाग से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें कोई विशेष मार्गदर्शन या सरकारी सहायता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर हाजीपुर से पौधे खरीदकर खेती शुरू की. अब तक उन्हें किसी प्रकार की सरकारी प्रोत्साहन राशि भी नहीं मिली है. इसके बावजूद अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने अमरूद की सफल खेती कर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है और आज इसी खेती से अपने परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण कर रहे हैं.


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Brajesh Divedi

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