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पांचों ज्ञानेंद्रियां ही ज्ञान का आधार : अभय

Updated at : 29 Nov 2025 3:48 PM (IST)
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पांचों ज्ञानेंद्रियां ही ज्ञान का आधार : अभय

श्री भागवत प्रसाद सिंह मेमोरियल बीएड कॉलेज में दो दिवसीय एजुकेशनल सेमिनार संपन्न

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श्री भागवत प्रसाद सिंह मेमोरियल बीएड कॉलेज में दो दिवसीय एजुकेशनल सेमिनार संपन्न औरंगाबाद कार्यालय. देव मोड स्थित श्री भागवत प्रसाद सिंह मेमोरियल बीएड कॉलेज में दो दिवसीय एजुकेशनल सेमिनार संपन्न हो गया. सेमिनार के दूसरे दिन बीएड कॉलेज के प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार यादव ने मुख्य अतिथि व श्री भागवत प्रसाद सिंह मेमोरियल ग्रुप ऑफ कॉलेज के निदेशक अभय कुमार सिंह को प्रतीक चिह्न, अंग वस्त्र व बुके देकर सम्मानित किया. श्री सिंह ने कहा कि मानव की ज्ञानेंद्रियां ही उसके ज्ञान का आधार होती हैं. व्यक्ति के शरीर में पांच प्रमुख ज्ञानेंद्रियां आंख, कान, नाक, जिह्वा और त्वचा होती है. आंख से देखते, कान से सुनते, नाक से गंध का, जिह्वा से स्वाद का और त्वचा से कठोर एवं मुलायम वस्तु का अनुभव करते है. यह सभी ज्ञानेंद्रियां सीखने, समझने, चिंतन, सूझबूझ और अनुभव का प्रमुख आधार है. आप जो सोचते हैं वह तभी कर पाते हैं जब आपकी ज्ञानेंद्रियां और कर्मेंद्रियां उसके लिए तैयार हो. हाथ-पैर, मुख, गुदा और उपस्थ पांच कर्मेंद्रियां भी होती है. इनका भी सीखने-सिखाने, खेलने-कूदने, खाने-पीने, भाव-भंगिमा प्रकट करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है. एजुकेशनल सेमिनार के मुख्य वक्ता व गंगा देवी महिला महाविद्यालय पटना की असिस्टेंट प्रोफेसर मनोविज्ञान विभाग डॉ शांभवी ने कहा कि सीखने सिखाने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पक्ष मनोसामाजिक होता है. बच्चों का मानसिक विकास के अंतर्गत चिंतन, मनन, तनाव चिंता आदि प्रभावित करते हैं. सामाजिक विकास की दृष्टि से पारिवारिक वातावरण, पड़ोस का माहौल, खेल के साथी, विद्यालय का वातावरण एवं परिवेश बच्चों को प्रभावित करता है. दूसरे वक्ता स्कूल ऑफ एजुकेशन, उद्योग भारतीय विद्यालय, सूरत (गुजरात) के प्राचार्य प्रशांत कुमार सिंह ने ऑनलाइन सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है. प्रत्येक समय एवं परिस्थिति में किसी न किसी रूप में विद्यमान रहती है. भाषाई दृष्टि से दूसरे राज्यों में शिक्षक बनने के लिए वहां की स्थानीय भाषा सीखना अनिवार्य होता है. यदि उत्तर भारत के हिंदी भाषी क्षेत्र से यदि कोई दक्षिण भारत में शिक्षक बनना चाहता है तो उसके लिए दक्षिण भारत की भाषाएं तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयालम आदि जरुरत के अनुसार सीखना, बोलना और समझना आना चाहिए. इस अवसर पर श्रेया गुप्ता ने मनोवैज्ञानिक पहलू पर, जय प्रकाश पाल ने शिक्षक प्रशिक्षण कौशल पर तथा राम विजय चौरसिया ने शिक्षक शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की. प्रशिक्षु मुकेश कुमार, रिमझिम कुमारी, सोनू कुमार आदि ने एजुकेशनल सेमिनार में अपना पेपर प्रजेंट किया तथा ऐसे प्रशिक्षुओं को सम्मानित किया गया. मंच संचालन बीएड प्रशिक्षु सोनाली कुमारी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन असिस्टेंट प्रोफेसर विकास चौबे ने दिया. दो दिवसीय एजुकेशनल सेमिनार का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ. इस अवसर पर सुदामा सिंह यादव, डॉ कमलेश पांडेय, अभिषेक मिश्रा, दीपक कुमार पाठक, ब्रजेंद्र कुमार, चंदन कुमार, राहुल सिंह, अभिषेक पांडेय, मोहन सिंह, शुभम सिंह, रौशन कुमार, आमोद कुमार, लालदेव यादव, मनीषा कुमारी, आशुतोष कुमार, अर्जुन साव आदि ने सेमिनार को सफल बनाने में भरपूर सहयोग किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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