Facebook पर एक दूसरे से भिड़े कांग्रेस MLA और औरंगाबाद के DM

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Jan 2017 8:09 AM

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औरंगाबाद नगर : औरंगाबाद जिले में कार्यपालिका और विधायिका में टकराव उत्पन्न हो गया है. एक तरफ सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक आनंद शंकर हैं, तो दूसरी तरफ जिला पदाधिकारी कंवल तनुज. दोनों के नाम से सोशल साइट फेसबुक पर बने अकाउंट्स पर एक-दूसरे पर आरोप मढ़े जा रहे हैं. उनके नाम से बने फेसबुक अकाउंट्स […]

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औरंगाबाद नगर : औरंगाबाद जिले में कार्यपालिका और विधायिका में टकराव उत्पन्न हो गया है. एक तरफ सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक आनंद शंकर हैं, तो दूसरी तरफ जिला पदाधिकारी कंवल तनुज. दोनों के नाम से सोशल साइट फेसबुक पर बने अकाउंट्स पर एक-दूसरे पर आरोप मढ़े जा रहे हैं. उनके नाम से बने फेसबुक अकाउंट्स पर चल रहे टकराव की जिले में खूब चर्चा भी हो रही है.
हालांकि ये अकाउंट्स उन्हीं के हैं या नहीं इसका सत्यापन प्रभात खबर ने नहीं किया है. अलबत्ता दोनों अकाउंट्स में तसवीरें उन्हीं की हैं. इधर, लोगों का कहना है कि विधायक व डीएम के बीच चल रहे इस टकराव से जिले का विकास कार्य प्रभावित होगा. पता चला है कि दोनों के बीच काफी नोकझोंक हुई और मामला इतना बिगड़ गया कि एसपी को मध्यस्थता करनी पड़ी. यह सब कुछ बंद कमरे में हुआ था. डीएम और विधायक के बीच हुई बातचीत के गवाह वहीं बैठे एसपी व एक और पदाधिकारी थे.
फेसबुक पोस्ट में नामों का खुलासा नहीं : दोनों व्यक्तियों के नाम से बने फेसबुक अकाउंट्स के वाल पर डाले गये पोस्ट में हालांकि किसी का नाम नहीं लिया गया है. विधायक के नाम पर बने फेसबुक अकाउंट के पोस्ट में एक साहब का हवाला दिया गया है जबकि डीएम के नाम पर बने अकाउंट के पोस्ट में श्रीमान कह कर संबोधित किया गया है.
छह जनवरी की घटना का है परिणाम
बताया जाता है कि घटना 11 दिन पहले की है. गत छह जनवरी को नोटबंदी के विरोध में कांग्रेस का धरना कार्यक्रम हुआ था. विधायक जी अपने कार्यकर्ताओं के साथ जिलाधिकारी से मिल कर ज्ञापन सौंपने गये थे. ज्ञापन सौंपने के बाद कार्यकर्ता तो लौट गये लेकिन विधायक जिलाधिकारी के कार्यालय में ही बैठे रहे. बताया जाता है कि लगभग एक घंटे से भी अधिक समय तक वह वहां रहे. बताया जा रहा है कि इस घंटे के दौरान दोनों के बीच जो भी बातें हुईं, जो अब सोशल मीडिया पर आ रही हैं.
आर्म्स लाइसेंस का है मामला
बताया जाता है कि विधायक आर्म्स लाइसेंस की मांग कर रहे थे और इसके लिये उन्होंने जिलाधिकारी पर दबाव बनाया. जिलाधिकारी ने उन्हें नियम का हवाला दिया और कहा कि अभी उनकी आर्म्स लाइसेंस की फाइल एसपी के यहां से नहीं आयी है, तो किस नियम के तहत आर्म्स लाइसेंस उन्हें दिया जाये.
विधायक जी को यह बात अच्छी नहीं लगी. उन्होंने कई लोगों के नाम गिना दिये. इस दौरान यह भी कहा कि इन लोगों को किस नियम के तहत लाइसेंस मिला. इस पर डीएम ने जवाब दिया कि जिस नियम से उनके लाइसेंस मिलेगा, उसी नियम से दूसरे लोगों को मिला होगा. फेसबुक पर डाले गये पोस्ट के अनुसार विधायक जी को शायद यह जवाब अच्छा नहीं लगा होगा और वह कड़ी आवाज में बोल गये होंगे.
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