पति से रविवार को ही मिल कर लौटी थीं अंजूम

Published at :04 Oct 2016 7:12 AM (IST)
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पति से रविवार को ही मिल कर लौटी थीं अंजूम

परिजनों की चीत्कार से दहला अलीनगर का इलाका सांत्वना देनेवालों की लगी कतार मुहल्लेवालों ने कहा सुलझे हुए इनसान थे क्यामुद्दीन औरंगाबाद शहर : गया जिले के कोठी थानाध्यक्ष व औरंगाबाद के अलीनगर मुहल्ले के रहने वाले क्यामुद्दीन अंसारी की हत्या के बाद उनके पैतृक गांव से लेकर जिला मुख्यालय स्थित घर तक मातमी सन्नाटा […]

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परिजनों की चीत्कार से दहला अलीनगर का इलाका
सांत्वना देनेवालों की लगी कतार
मुहल्लेवालों ने कहा सुलझे हुए इनसान थे क्यामुद्दीन
औरंगाबाद शहर : गया जिले के कोठी थानाध्यक्ष व औरंगाबाद के अलीनगर मुहल्ले के रहने वाले क्यामुद्दीन अंसारी की हत्या के बाद उनके पैतृक गांव से लेकर जिला मुख्यालय स्थित घर तक मातमी सन्नाटा पसर गया. जैसे ही हत्या की खबर अलीनगर वाले घर पर पहुंची, घर में कोहराम मच गया. परिजनों की चीत्कार से अलीनगर का कोना-कोना दहल उठा. पौ फटते ही रोने चिल्लाने की आवाज जैसे ही पड़ोसियों को लगी, वैसे ही भागकर क्यामुद्दीन अंसारी के घर पर पहुंच गये.
थोड़े ही देर में सैकड़ों की भीड़ लग गयी. पड़ोसी व जान-पहचान वाले लोग भागते हुए पहुंचे और घटना के बारे में जानकारी ली. हर किसी के चेहरे पर उदासी और मायूसी साफ झलक रही थी. शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसकी आंखें घटना की सूचना पर छलकी न हों. पत्नी अंजुम आरा और मां शाहीदा खातून की चीत्कार से सबकी आंखों में आंसू आ गये. हर कोई घटना को लेकर आश्चर्यचकित था. किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि एक सुलझे हुए इंसान क्यामुद्दीन अंसारी अब इस दुनिया में नहीं रहे. सबसे ज्यादा गहरा आघात उस मां को लगा था, जिस मां ने जन्म देने के बाद उसकी परवरिश की और फिर उसे एक काबिल इंसान बनाया. मां शाहीदा खातून को बेटे के गम ने पागल सा कर दिया था. जब भी कोई उन्हें सांत्वना देने की कोशिश करता, उसके हाथ खींच कर अलग कर देती. उनकी जुबान से एक ही बात निकल रही थी कि अल्लाह ने इक्या इसी दिन के लिये जिंदा रखा था. यही हाल पिता सेराज अंसारी का भी था.
जब भी मिलते खैरियत जरूर पूछते
कोठी थानाध्यक्ष क्यामुद्दीन अंसारी की हत्या ने पूरे परिवार को तो हिला कर रख ही दिया, गांव और मुहल्ले के लोग भी गहरे सदमे में हैं. कोई भी व्यक्ति यह विश्वास नहीं कर रहा था कि ऐसे कैसे हो गया. जिस अदरी गांव के वो रहने वाले थे, उस गांव के लोग जानकारी मिलते ही भागे दौड़े चले आये. चाचा मो जमालुद्दीन अंसारी, गांव के कपिलदेव यादव, राजेंद्र यादव, राम प्रवेश सिंह, विनय सिंह, संजय कुमार, अलीनगर के पड़ोसी व रिश्तेदार फिरोज अहमद, रफीक अहमद ने कहा कि ईश्वर ने इस परिवार के साथ नाइंसाफी की है.
क्यामुद्दीन अंसारी के बारे में बिलखते हुए पड़ोसियों ने कहा कि वे सुलझे हुए और ईमानदार इंसान थे. जब भी मिलते खैरियत जरूर पूछते थे. जब भी औरंगाबाद आते एक बार अपने गांव जरूर हाल जानने पहुंचते थे. दशहरा के त्योहार में गांव आने का वादा किया था. उन्होंने कहा था कि इस बार का दशहरा एक साथ मनायेंगे.
कयामुद्दीन ने जल्द ही घर आने का किया था वादा
कयामुद्दीन अंसारी की हत्या के बाद पत्नी अंजुम आरा की हालत बद से बदतर हो गयी थी.पति की मौत का सदमा उसे इस कदर लगा, जैसे वह कुछ जानती ही नहीं हो. रह-रह कर वह चीत्कार उठती और फिर शांत हो जाती. बिलखते हुए कहती की कल ही वादा किया था आने का. अब तो किस्मत भी रूठ गयी, अब किसके भरोसे और कौन पूछेगा हमारा हाल. पता चला कि अंजुम आरा की तबीयत अचानक खराब हुई थी, इसके बाद वह रविवार की सुबह इलाज के लिये गया गयी थी. पति ने फोन कर उसे कोठी आने को कहा, इलाज के बाद अंजुम कोठी भी गयी और घंटे-दो घंटे पति के साथ बिता कर शाम को घर लौट गयी थी. पति ने जल्द ही घर आने का वादा किया था.
शव देखते ही चीख उठे पिता व भाई
भाईजान, हमलोगों को छोड़कर हमेशा के लिए कहां चले गये. अब हम भाभी को क्या जबाब देंगे. कोठी थाना परिसर में रोते हुए यह बातें थानाध्यक्ष के छोटे भाई आदिल अंसारी कही. अपने बड़े भाई का शव देखते ही वह दहाड़ मार कर रोने लगे. रोते–रोते उन्होंने बताया कि भैया की सुरक्षा को लेकर हमलोगों को बहुत ही चिंता सताते रहता था. अपने पुत्र की अंतिम दर्शन करने पहुंचे थानाध्यक्ष के पिता मोहम्मद सरोज अहमद अंसारी फूट-फूट कर रोते हुए अपने पुत्र को देखने के बाद कहा कि या अल्लाह, यह क्या कर दिया. अब इस उम्र में यही दिखलाना बाकी रह गया था. यह हृदय विदारक शब्द सुनकर उपस्थित लोग अचंभित रह गये.
कई थानों में थानाध्यक्ष की भूमिका निभा चुके हैं क्यामुदीन
कोठी थानाध्यक्ष मोहम्मद क्यामुदीन अंसारी जिले के कई थानों में थानाध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं. वह जहां भी रहे, वह अपने कार्यशौली के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे. जानकारी के अनुसार, क्यामुदीन अंसारी कोठी थाना में योगदान देने के पूर्व आमस, डेल्हा, चांकद व खिजरसराय थाना में अपनी सेवा दे चुके हैं. कोठी थाना में उनकी पोस्टिंग 13 जनवरी 2015 को हुआ था. अपनी नौकरी के कम समय में ही वह अपने वरीय अधिकारियों के चहेते बने हुए थे. इन क्षेत्र में चाहे नक्सली संगठन के आॅपरेशन में जाना हो या किसी अपराधिक घटना में कार्रवाई को लेकर जाना हो. वह हमेशा ही समय पर पहुंच कर मसले को सुलझाने की कोशिश में जुट जाते थे. समस्याओं को सुलझाने पर उन्हें महारत हासिल थी.
आठ साल शिक्षक की नौकरी कर 2009 में गये थे पुलिस सेवा में
कोठी थानाध्यक्ष कयामुद्दीन अंसारी अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे. कयामुद्दीन के मंझले भाई नईम अंसारी की पत्नी जुलेखा खातून हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में बसडीहा पंचायत से दूसरी बार मुखिया बनी हैं. छोटे भाई आदिल अंसारी दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहा है.
क्यामुद्दीन अंसारी के चार बच्चे है. जिनमें तीन पुत्री गुलप्सा, अलीशा, सानिया और एक पुत्र ओबैस है. बड़ी बेटी की उम्र 13 वर्ष है और वह अपनी एक बहन के साथ चाचा के साथ रह कर दिल्ली में ही पढ़ाई करती है. क्यामुद्दीन अंसारी वर्ष 1999 में शिक्षक के तौर पर बहाल हुए थे. उर्दू मध्य विद्यालय पहरपुरा और बुधौल विद्यालय में लगभग आठ सालों तक बच्चों को पढ़ाने का काम किया. इसके बाद 2009 में पुलिस सेवा में योगदान दिया. 2009 बैच के दारोगा कयामुद्दीन अंसारी की पहली पोस्टिंग आमस थाना में हुआ था. इसके बाद वे डेल्हा, चाकन, गुरुआ में अपनी सेवा दी. हाल ही में कोठी थानाध्यक्ष के रूप में उनकी पदस्थापना हुई थी. कयामुद्दीन अंसारी की शादी 1998 में औरंगाबाद शहर के ही नावाडीह में इकबाल अहमद की बहन अंजूम आरा से हुई थी.
गिरफ्तारी को लेकर एसआइटी का गठन
कोठी थानाघ्यक्ष की हत्या की खबर सुनते ही एसएसपी गरिमा मलिक कोठी थाना पहुंची. कुछ समय बाद घटनास्थल से थानाध्यक्ष के शव को एंबुलेंस द्वारा थाना परिसर में लाया गया. एंबुलेंस में शव देखते ही एसएसपी को कुछ देर के शॉक लगा और वहां मौजूद अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली. एसएसपी ने इमामगंज डीएसपी नंदकिशोर रजक, शेरघाटी डीएसपी उपेन्द्र प्रसाद, इमामगंज थानाध्यक्ष अर्जुन प्रसाद, इमामगंज सर्किल इंस्पेक्टर विनोद कुमार, बांकेबाजार थानाध्यक्ष शशि कुमार राणा, रोशनगंज थानाध्यक्ष अमरदीप कुमार, भदवर थानाध्यक्ष सत्यम चंद्रवंशी सहित अन्य थानाध्यक्षों के साथ बैठक की और एसआइटी का गठन किया. एसएसपी ने एसआइटी का गठन कर अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर दिशा-निर्देश दिया.
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