शहीदों की अंतिम विदाई के समय रोया पूरा गांव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Jul 2016 6:29 AM (IST)
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गया-औरंगाबाद : सीमा पर नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में शहीद 10 जवानों में तीन बिहार के खगड़िया, बक्सर व सीवान के थे. इनके शव मंगलवार की देर रात इनके गांव पहुंचे. बुधवार की सुबह इनका अंतिम-संस्कार किया गया. शहीदों की शवयात्रा में पूरा गांव शामिल हुआ. अंतिम विदाई के समय सभी की आंखें भर गयीं. […]
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गया-औरंगाबाद : सीमा पर नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में शहीद 10 जवानों में तीन बिहार के खगड़िया, बक्सर व सीवान के थे. इनके शव मंगलवार की देर रात इनके गांव पहुंचे. बुधवार की सुबह इनका अंतिम-संस्कार किया गया. शहीदों की शवयात्रा में पूरा गांव शामिल हुआ. अंतिम विदाई के समय सभी की आंखें भर गयीं.
खगड़िया >> कांपते हाथों से पिता ने इकलौते पुत्र को दी मुखाग्नि
बक्सर >> जिसे पाला-पोसा, उसी की अरथी को देना पड़ा कंधा
सीवान >> पूरे परिवार पर टूटा गमों का पहाड़, बेसुध हुई पत्नी
नक्सली मुठभेड़ में शहीद खगड़िया के जाबांज जवान दिवाकर कुमार को राजकीय सम्मान के अंतिम विदाई दी गयी. बुधवार को शहीद दिवाकर के पार्थिव शरीर को उसके पैतृक गांव झंझरा लाया गया. परबत्ता प्रखंड के झंझरा गांव निवासी तनुकलाल तिवारी ने कांपते हाथों से सीआरपीएफ कमांडो दिवाकर कुमार को मुखाग्नि दी. इस दौरान वहां मौजूद हर आंखें नम हो गयीं. घर के इकलौते चिराग को मुखाग्नि देते वक्त तनुकलाल बदहवास हो गये. पिता की आंखों की बहती आंसुओं की धारा बता रही थी कि दिवाकर की शहादत से परिवार के सारे सपने चकनाचूर हो गये हैं. शहीद के पिता ने इतना ही कहा कि अब मेरे बुढ़ापे का सहारा कौन होगा… अब मुझे कौन मुखाग्नि देगा.
अनिल को बड़े नाज से पाला था. उसे कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी. आज उसी को कंधा देना पड़ रहा है. इतना कहते-कहते शहीद अनिल के बड़े भाई राजराम सिंह फफक पड़े. नियति ने उनके साथ बहुत क्रूर मजाक किया है. उनके बेटे जैसे भाई को छीन लिया, जिसे कभी चलना सिखाया, आज उसी के लिए अरथी तैयार करनी पड़ रही है. सोचा था बूढ़ा होने पर अनिल उनकी सेवा करेगा, पर आज उसी के पार्थिव शरीर को उठाना पड़ गया. बक्सर के चरित्र वन घाट पर शहीद का अंतिम संस्कार किया गया. स्थिति उस समय हृदय विदारक हो गयी, जब तीन साल के अभिनव ने अपने पापा को मुखाग्नि दी. अबोध बच्चे द्वारा अंतिम संस्कार किये जाने पर सभी की आंखों में आंसू आ गये.
रवि के रूप में इस घटना ने जहां अपने लाल को खोया, वहीं नम्रता की जिंदगी ही उजड़ गयी. पति की मौत की खबर मिलने के बाद से ही नम्रता बेसुध पड़ी है. सुबह जब शवयात्रा शुरू हो रही थी, उसके पहले अंतिम दर्शन के लिए नम्रता को घरवाले बाहर लाये. नम्रता ने अपने दिवंगत पति के शव पर माल्यार्पण किया, तो वहां मौजूद हर कोई रो पड़ा. दहाड़ मार कर रोती रवि की मां संध्या देवी व बहन प्रिया के आंसू को देख वहां मौजूद हर कोई फफक पड़ा. दरौली की सरयू नदी के मलपुरवा घाट पर राजकीय सम्मान के बीच रवि प्रताप की अंत्येष्टि हुई. इस दौरान सीआरपीएफ के मुजफ्फरपुर रेंज के कमांडेंट वीके राय के साथ आये जवानों ने अपने साथी को हवा में गोलियां दाग कर सलामी दी.
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