एनसीटीइ व राजभवन के निर्देश नहीं मानते बीएड कॉलेज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Jun 2016 7:58 AM (IST)
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पिछले साल यूनिवर्सिटी की ओर से लिये गये एंट्रेंस एग्जाम में भी नहीं हुए थे शामिल अल्पसंख्यक कॉलेज के नाम पर भी चलती है मनमानी, फीस में भी करते हैं मनमानी बीएड-एमएड में कहीं भी परमानेंट शिक्षक नहीं, फिर भी चल रहा काम अमित कुमार पटना : बीएड कॉलेज में नामांकन को लेकर जमकर मनमानी […]
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पिछले साल यूनिवर्सिटी की ओर से लिये गये एंट्रेंस एग्जाम में भी नहीं हुए थे शामिल
अल्पसंख्यक कॉलेज के नाम पर भी चलती है मनमानी, फीस में भी करते हैं मनमानी
बीएड-एमएड में कहीं भी परमानेंट शिक्षक नहीं, फिर भी चल रहा काम
अमित कुमार
पटना : बीएड कॉलेज में नामांकन को लेकर जमकर मनमानी चलती है. इसका आलम यह है कि ये कॉलेज एनसीटीइ और राजभवन के दिशा-निर्देशों को भी नहीं मानते, वहीं अल्पसंख्यक कॉलेज होने का दावा करके भी कुछ कॉलेज जमकर मनमानी कर रहे हैं. फीस में भी मनमानी चल रही है.
आलम यह है कि बीएड व एमएड में कुछ एक काॅलेजों को छोड़कर कहीं भी परमानेंट शिक्षक नहीं है फिर भी जैसे तैसे एडहॉक व गेस्ट व कम क्वालिफाइ शिक्षकों के भरोसे कई कॉलेज चल रहे हैं. इंफास्ट्रक्चर की भी भारी कमी है. पढ़ाई के नाम पर वहां सिर्फ खानापूर्ति होती है. ये कॉलेज सिर्फ डिग्री बांटने के संस्थान बनकर रहे गये हैं. हैरत की बात यह है कि इन सबके बावजूद भी इन कॉलेजों की मान्यता बची रहती है और मनमाने ढंग से ये एडमिशन भी लेते रहते हैं.
नकेल के बावजूद मनमानी .एनसीटीइ के नये रेगुलेशन बनाने का उद्देश्य ही ऐसे बीएड कॉलेजों पर नकेल कसना था, जो मनमानी करते हैं. दो वर्षीय कोर्स के साथ ही एनसीटीइ ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि एेसे सभी कॉलेज जो बीएड चला रहे हैं उन्हें अपना इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वालिफाइड शिक्षकों की संख्या को बेहतर करना होगा. सूत्र बताते हैं कि अगर शिक्षको के क्वालिफिकेशन की जांच की जाये तो उनमें कई फर्जी या कम क्वालिफाई भी मिलेंगे. सच्चाई अभी भी यही है कि कई ऐसे काॅलेज हैं जहां इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है.
इन कॉलेजों की अगर जांच की जाये तो इनमें कई ऐसे हैं जो एनसीटीई के मानक पर खड़े नहीं उतरेंगे. ये काॅलेज विश्वविद्यालयों से मान्यता लेकर बीएड के नाम पर जमकर खेल करते हैं. मनमाना फीस और कमीशन वसूला जाता है. पहले तो यह और खुलेआम होता था लेकिन हैरत की बात यह है कि राजभवन और एनसीटीई के सख्ती के बाद भी ये कॉलेज मनमानी करने से बाज नहीं आये और कई ने मानकों को ताक पर रख कर पिछले वर्ष नामांकन ले लिया. अब कोर्ट की शरण में हैं.
मगध विवि के कॉलेजों के द्वारा ही एक अल्पसंख्यक कॉलेजों का संघ बना लिया गया है और अब वे पटना वीमेंस कॉलेज की तर्ज पर ही अपने अाप को एंट्रेंस टेस्ट से दूर रखने की मांग करते हैं. पटना वीमेंस कॉलेज अल्पसंख्यक कॉलेज होने के नाते खुद को विवि द्वारा लिये जाने वाले एंट्रेंस टेस्ट के नियम से अलग बताती है़
पिछले वर्ष प्राइवेट कॉलेज में बीएड में नामांकन का मामला कोर्ट में है. जो भी निर्णय होगा वह विवि द्वारा माना जायेगा.
इसराइल खान, एजुकेशन के निदेशक, एमयू
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