अप्रैल में छात्रों को सौंपने की तैयारी

Updated at :13 Jan 2015 11:20 AM
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अप्रैल में छात्रों को सौंपने की तैयारी

औरंगाबाद (ग्रामीण) : लगभग 11 साल बाद औरंगाबाद जिले का इकलौता अल्पसंख्यक कल्याण छात्रावास के दिन बहुरने वाले हैं. अप्रैल 2015 तक जीर्णोद्धार का काम तो समाप्त हो ही जायेगा, जिला प्रशासन अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रावास सौंपने की पूरी तैयारी भी कर ली है. 49 लाख 49 हजार रुपये की लागत से भवन प्रमंडल विभाग […]

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औरंगाबाद (ग्रामीण) : लगभग 11 साल बाद औरंगाबाद जिले का इकलौता अल्पसंख्यक कल्याण छात्रावास के दिन बहुरने वाले हैं. अप्रैल 2015 तक जीर्णोद्धार का काम तो समाप्त हो ही जायेगा, जिला प्रशासन अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रावास सौंपने की पूरी तैयारी भी कर ली है. 49 लाख 49 हजार रुपये की लागत से भवन प्रमंडल विभाग द्वारा जीर्णोद्धार का काम कराया जा रहा है.

भवन जीर्णोद्धार के बाद वायरिंग की प्रक्रिया शुरू होगी. फिर बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफॉर्मर लगाया जायेगा. अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी अशोक दास ने बताया कि वायरिंग के लिए रुपये भी उपलब्ध करा दिया गया है. बिजली ट्रांसफॉर्मर के लिए कार्यपालक अभियंता से बात की गयी है. भवन जीर्णोद्धार के बाद एक अल्पसंख्यक छात्रावास के लिए कमेटी का भी गठन होगा. कमेटी को छात्रावास सौंपी जायेगी और इसके बाद छात्रों को छात्रावास से जोड़ा जायेगा.

दो दर्जन से ऊपर कमरों से सुसज्जित अल्पसंख्यक कल्याण छात्रावास का निर्माण अदरी नदी के तट पर नावाडीह इदगाह के समीप कराया गया था. इसमें लाखों रुपये खर्च किये गये थे. उद्घाटन भी अजीब ढंग से हुआ था. भाजपा कार्यकर्ताओं ने उद्घाटन का विरोध किया था. अंतत: 10 सितंबर 2003 को सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने छात्रावास का उद्घाटन किया.

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण विधि व ऊर्जा विभाग मंत्री शकील अहमद खान, पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश पासवान, विधायक सुरेश मेहता, भीम कुमार शामिल थे. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद भी उपस्थित थे. उद्घाटन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोषणा की था कि जल्द ही यह छात्रावास छात्रों को सौंप दिया जायेगा. लेकिन, उद्घाटन के बाद छात्रावास को कोई देखने वाला भी नहीं रहा. न तो इसके लिए कमेटी ही बनायी गयी और किसी को रखरखाव की जिम्मेवारी सौंपी गयी. इसका हश्र यह हुआ कि जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, वैसे-वैसे छात्रावास अपनी जजर्रता को छूने लगा. छात्रावास परिसर में लगे ट्रांसफॉर्मर को असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया. बिजली तार चोरी हो गयी. शौचालय के सीट को उखाड़ दिया गया और पत्थर मार कर छात्रावास की खिड़की व दरवाजे में लगे शीशे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया. कई वर्षो तक यह छात्रावास घुमंतु भोटिया का सहारा बन कर रह गया. कई बार यहां परीक्षा सेंटर भी बनाया गया. चुनाव में पुलिस जवानों को भी ठहराया गया, लेकिन इसकी व्यवस्था पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया गया. आखिरकार लाखों की लागत से बना छात्रावास जजर्र हो गया.

फिर जजर्र हुए छात्रावास को जीर्णोद्धार प्रारंभ कराया गया है. अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी की मानें तो जल्द ही इसके दिन बहुरने वाले हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सचमुच के दिन बहुरेंगे, या फिर एक बार जीर्णोद्धार कराया जायेगा?

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