औरंगाबाद में देह व्यापार का फैलता नेटवर्क, कोड वर्ड में होती है डील, बाहरी लड़िकयों की अधिक डिमांड, पढ़िए पूरी रिपोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर
जिले में देह व्यापार का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है. शहर के कई गेस्ट हाउस, छोटे होटल और बाजार से बाहर संचालित लॉज अवैध कारोबार के अड्डे बनते जा रहे हैं.
Aurangabad Sex Racket: जिले में देह व्यापार का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है. शहर के कई गेस्ट हाउस, छोटे होटल और बाजार से बाहर संचालित लॉज अवैध कारोबार के अड्डे बनते जा रहे हैं. खासकर महाराजगंज रोड, पुरानी जीटी रोड और बाजार इलाके से बाहर स्थित गेस्ट हाउसों में यह धंधा बिना रोक-टोक के जारी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि देर शाम से लेकर पूरी रात तक संदिग्ध गतिविधियां यहां आम हो चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है.
“प्रति घंटा”, “फुल” और “फुल नाइट” जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल
सूत्रों के अनुसार होटल और गेस्ट हाउस संचालक खुले तौर पर नहीं बल्कि खाने के डीस जैसे कोड वर्ड के जरिए ग्राहकों से बातचीत करते हैं. प्रति घंटा, फुल और फुल नाइट जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सौदे किए जाते हैं. बताया जा रहा है कि एक से दो घंटे के लिए अलग शुल्क और पूरी रात के लिए अलग रकम वसूली जाती है.कई जगहों पर सिर्फ 500 रुपये में कमरे उपलब्ध करा दिए जाते हैं, जिसके बाद अंदर होने वाली गतिविधियों पर कोई निगरानी नहीं रहती.
कैसा होता है डील
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई गेस्ट हाउसों के रिसेप्शन पर बैठने वाले कर्मचारी भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा बने हुए हैं. बाहर से आने वाले ग्राहकों को सीधे कमरे तक पहुंचाया जाता है और नकद भुगतान को प्राथमिकता दी जाती है ताकि कोई रिकॉर्ड न रहे.
बाहरी लड़कियों की अधिक डिमांड, रेट भी ज्यादा
जानकारी के मुताबिक इस नेटवर्क में स्थानीय लड़कियों की तुलना में दूसरे जिलों और राज्यों से लाई गई युवतियों की मांग ज्यादा है. इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि बाहरी लड़कियों को “स्पेशल” बताकर अधिक रकम वसूली जाती है. सूत्रों का दावा है कि कुछ गिरोह सोशल मीडिया और मोबाइल नेटवर्क के जरिए भी ग्राहकों तक पहुंच बना रहे हैं.कई मामलों में युवतियों को नौकरी, डांस प्रोग्राम या शादी समारोह में काम दिलाने का झांसा देकर इस धंधे में धकेले जाने की बात भी सामने आ रही है. हालांकि पुलिस के पास अब तक बहुत कम मामले आधिकारिक रूप से पहुंच पाए हैं.
आर्केस्ट्रा संचालकों पर भी उठ रहे सवाल
जिले में चलने वाले कुछ आर्केस्ट्रा ग्रुपों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं.आरोप है कि कई आर्केस्ट्रा संचालक कार्यक्रमों की आड़ में लड़कियों की सप्लाई का काम कर रहे हैं. शादी और निजी आयोजनों के बहाने संपर्क बढ़ाकर बाद में ग्राहकों को होटल और गेस्ट हाउस तक पहुंचाया जाता है. ग्रामीण इलाकों में होने वाले आयोजनों के बाद यह नेटवर्क और अधिक सक्रिय हो जाता है.
पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती. लोगों का आरोप है कि कुछ जगहों पर पुलिस की छापेमारी पहले से लीक हो जाती है, जिसके कारण संचालक सतर्क हो जाते हैं.हालांकि पुलिस अधिकारी समय-समय पर अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई का दावा करते रहे हैं.सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर रोक नहीं लगी तो इसका असर युवाओं और सामाजिक माहौल पर गंभीर रूप से पड़ सकता है. लोगों ने प्रशासन से होटल, लॉज और गेस्ट हाउसों की नियमित जांच, ग्राहकों की अनिवार्य आईडी जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी की मांग की है.
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
औरंगाबाद में तेजी से फैल रहा यह अवैध कारोबार अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. शहर के कई इलाकों में खुलेआम चल रहे इस नेटवर्क ने कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और अवैध कारोबार पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाता.
क्या कहता है कानून
अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति महिलाओं या युवतियों को ग्राहकों तक पहुंचाने, सौदा तय कराने या कमीशन लेने का काम करता है तो यह अपराध माना जाता है. इसमें दलाल, एजेंट और नेटवर्क चलाने वाले लोग शामिल होते हैं.अगर कोई होटल संचालक, लॉज मालिक या गेस्ट हाउस संचालक जानबूझकर अपने परिसर का इस्तेमाल देह व्यापार के लिए होने देता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. ऐसे मामलों में होटल सील करने तक की कार्रवाई संभव है.सड़क, बाजार, बस स्टैंड या सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों को आकर्षित करना या संकेत देना भी कानून के तहत अपराध है.
मानव तस्करी गंभीर अपराध
अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने कहा कि किसी लड़की या महिला को बहला-फुसलाकर, नौकरी का झांसा देकर या दबाव बनाकर इस धंधे में धकेला जाता है तो यह गंभीर अपराध है. मानव तस्करी के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है.
क्या सजा हो सकती है
देह व्यापार के अड्डे चलाने पर कई वर्षों की जेल और जुर्माना का प्रावधान है.मानव तस्करी में सात साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा संभव है.नाबालिगों से जुड़े मामलों में और भी सख्त प्रावधान लागू होते हैं.
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By Sakshi kumari
साक्षी पत्रकारिता और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में उनकी विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. साक्षी सीवान की रहने वाली हैं. उन्होंने गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, जनसंचार और समाचार लेखन की बारीकियों का अध्ययन किया. स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद भी उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखी और वर्तमान में नौकरी के साथ-साथ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रही हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप के दौरान फील्ड रिपोर्टिंग, समाचार संकलन और ग्राउंड रिपोर्टिंग की व्यावहारिक समझ विकसित की. इस दौरान उन्होंने समाचारों के विभिन्न पहलुओं को नजदीक से समझा और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से सीखा. इसके बाद उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. जहां करीब तीन वर्षों तक डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहीं. इस दौरान उन्होंने राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण खबरों पर काम किया. News4Nation में कार्यरत रहते हुए उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की विस्तृत कवरेज की. चुनावी राजनीति, मतदाताओं के व्यवहार, राजनीतिक रणनीतियों और जमीनी मुद्दों को करीब से समझने का अवसर मिला. इस अनुभव ने उन्हें राजनीतिक खबरों को अधिक सटीकता, तथ्यों और विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करने की विशेषज्ञता प्रदान की. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति, प्रशासनिक गतिविधियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी समझ है, जिसके अनुरूप वह खबरों को इस प्रकार तैयार करती हैं कि वे पाठकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचें और खोज इंजन में बेहतर प्रदर्शन करें. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, उसकी त्वरित कवरेज और कम समय में सटीक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है. साक्षी किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं. वह विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद ही खबरों को प्रकाशित करती हैं, जिससे उनकी रिपोर्टिंग में सटीकता और विश्वसनीयता बनी रहती है. न्यूजरूम में डेटा विश्लेषण, ट्रेंड मॉनिटरिंग और पाठकों की रुचि के आधार पर सर्वे एवं रिसर्च-आधारित खबरें तैयार करने में भी उन्हें बखूबी आता है. निरंतर सीखने और बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ स्वयं को अपडेट रखने की उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक बेहतर डिजिटल पत्रकार बनने के लिए प्रेरित करती है. तथ्यपरक, निष्पक्ष और भरोसेमंद पत्रकारिता में विश्वास रखने वाली साक्षी पाठकों तक गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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