उम्र बढ़ने के साथ प्रबल हो जाती है प्रोस्टेट की समस्या

Updated at : 10 May 2018 4:58 AM (IST)
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उम्र बढ़ने के साथ प्रबल हो जाती है प्रोस्टेट की समस्या

60 वर्ष तक की आयु वाले 50 प्रतिशत से अधिक पुरुषों में होती है यह व्याधि औरंगाबाद सदर : जिस तरह महिलाएं उम्र बढ़ने पर रजोनिवृति से प्रभावित होती है, उसी तरह से पुरुष भी बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लाशिया ‘बीपीएच’ से प्रभावित होते हैं. यह जानकारी पटना के मूत्ररोग विशेषज्ञ व किडनी ट्रांसप्लांट लेप्रोस्कोपिक सर्जन कुमार […]

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60 वर्ष तक की आयु वाले 50 प्रतिशत से अधिक पुरुषों में होती है यह व्याधि

औरंगाबाद सदर : जिस तरह महिलाएं उम्र बढ़ने पर रजोनिवृति से प्रभावित होती है, उसी तरह से पुरुष भी बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लाशिया ‘बीपीएच’ से प्रभावित होते हैं. यह जानकारी पटना के मूत्ररोग विशेषज्ञ व किडनी ट्रांसप्लांट लेप्रोस्कोपिक सर्जन कुमार राजेश रंजन ने दी. उन्होंने बताया कि इस समस्या में प्रोस्टेट असामान्य रूप से बढ़ता है. बीपीएच बढ़ती उम्र के साथ होने वाली आम समस्या है. 60 वर्ष तक की आयु वाले, 50 प्रतिशत से अधिक पुरुषों में बीपीएच हो जाता है और 80 वर्ष की उम्र होने तक 90 प्रतिशत पुरूषों में यह समस्या जन्म ले लेती है. प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने से मूत्र त्याग में दिक्कत होती है,
बार-बार मूत्र त्याग के लिए जाना पड़ता है. लेकिन जब व्यक्ति मूत्र त्याग करने की कोशिश करता है तो संतोषजनक तरीके से पेशाब नहीं कर पाता है. बीपीएच के रोगियों को पूरी तरह से मूत्राशय खाली कर पाने में असमर्थता के कारण परेशानी होती है. 60 प्रतिशत से अधिक पुरुष बढ़े हुए प्रोस्टेट के कारण रात में दो बार से अधिक मूत्र त्याग के लिए जाते हैं. अगर समय पर इसका इलाज नहीं हो तो बार-बार मूत्र मार्ग संबंधी संक्रमण, मूत्राशय में पथरी और क्रोनिक किडनी रोग हो सकते हैं.
इन दो टेस्टों से पता चलेगा प्रोस्टेट
डिजिटल रेक्टल टेस्ट (डीआरई) और प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन टेस्ट (पीएसए टेस्ट) ऐसे दो परीक्षण हैं, जो यह पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि क्या व्यक्ति को प्रोस्टेट रोग का अधिक खतरा है या नहीं. 40 साल से अधिक उम्र को लोगों को हर साल में एक बार प्रोस्टेट हेल्थ चेकअप कराना चाहिए. यह एज फैक्टर की गंभीर बीमारी है.
मूत्र से खून आना हो सकता है जानलेवा : पेशाब में खून आना आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है. यह लक्षण यूरीनरी अथवा प्रोस्टेट कैंसर का है. अगर बीमारी का इलाज शुरुआती दौर में नहीं हुआ तो मरीज को अपने जान से हाथ धोना पड़ता है. डॉ राजेश ने बताया कि ऐसे लक्षण उजागर होने पर तुरंत किसी मूत्र रोग विशेषज्ञ से मिल कर इलाज करवाना चाहिए.
चिकित्सा शिविर का होगा आयोजन : डॉ राजेश रंजन ने बताया कि जिले में बढ़ती मूत्र रोग की समस्याओं के मद्देनजर दाउदनगर में आगामी 20 मई को मूत्र रोग से संबंधित मरीजों के लिए चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जायेगा. इस शिविर में मूत्र रोग से संबंधित समस्या वाले मरीजों का नि:शुल्क जांच व इलाज किया जायेगा व उन्हें मुफ्त में दवाइयां भी दी जायेंगी.
प्रोस्टेट में परहेज जरूरी, क्या नहीं खाएं
फैट और चिकनाई वाला भोजन कम-से-कम करें, रेड मीट का सेवन से भी परहेज करें, डिब्बा बंद टमाटर, सॉस, या अन्य डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों से दूर रहें. जंक फ़ूड, चिप्स, अधिक चीनी, मैदा आदि का परहेज करें.अधिक कैल्शियम वाले खाने से परहेज रखें, कम मात्रा में दही ले सकते हैं.बहुत ज्यादा तीखे, मसालेदार भोजन से भी बचना चाहिए. शराब पीना भी नुकसानदायक है. उन्होंने बताया कि कई अध्ययनों में पता चला है कि बियर शरीर में पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलने वाले प्रोलेक्टिन हार्मोन का स्तर बढ़ा देती है, जिसका परिणाम अंततः प्रोस्टेट के बढ़ने के रूप में सामने आता है.
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