डेढ़ वर्ष में 85 लोगों ने ही कराया शादी का निबंधन

Updated at : 05 May 2018 3:24 AM (IST)
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डेढ़ वर्ष में 85 लोगों ने ही कराया शादी का निबंधन

औरंगाबाद नगर : विवाहों का रजिस्ट्रेशन करना है, लेकिन लोग शादी के निबंधन में रुचि नहीं ले रहे हैं. इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि जिस हिसाब से शादियां हो रही हैं, उस हिसाब से निबंधन नहीं हो रहा हैं. विभिन्न कार्यों के लिए मैरेज सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. वे निबंधन कार्यालय से […]

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औरंगाबाद नगर : विवाहों का रजिस्ट्रेशन करना है, लेकिन लोग शादी के निबंधन में रुचि नहीं ले रहे हैं. इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि जिस हिसाब से शादियां हो रही हैं, उस हिसाब से निबंधन नहीं हो रहा हैं. विभिन्न कार्यों के लिए मैरेज सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. वे निबंधन कार्यालय से लेकर कोर्ट-कचहरी तक का चक्कर लगाते हैं.
निबंधन विभाग का आंकड़ा बताता हैं कि वर्ष 2017 में 64, तो 2018 में अब तक 21 लोगों ने ही विवाह का निबंधन कराया है, जबकि बिहार विवाह निबंधन नियमावली 2006 के अनुसार, वार्ड पार्षदों व पंचायत के मुखिया जी को विवाह के रजिस्ट्रेशन का अधिकार दिया गया है. इसके तहत उन्हें वार्डों व पंचायत में होनेवाले विवाह का रजिस्ट्रेशन कर उसकी एक प्रति जिला अवर निबंधक कार्यालय को उपलब्ध कराना होता है.
अवर निबंधक ने वार्ड पार्षदों व मुखिया को दिये हैं निर्देश : विवाह निबंधित करने के लिए जिला अवर निबंधक ने वार्ड पार्षदों व मुखिया को निर्देश भी दिये. हालांकि, वार्ड पार्षदों व मुखिया की रुचि नहीं होने के कारण विवाह का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाता है. बाल विवाह को समाप्त करने और सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाओं को आसानी से मिल सके, इसके लिए विवाह निबंधन का अनिवार्य है. साथ ही लोगों को इसके लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़े, इसके लिए इसे आसान बनाया गया है.
सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है उद्देश्य : बाल-विवाह को समाप्त करना-सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना, ट्रैफिकिंग की शिकार होने पर महिला की जानकारी मिलना व किसी प्रकार का हादसा होने पर कानूनी लाभ.
ऐसे किया जाता है रजिस्ट्रेशन
बिहार विवाह निबंधन नियमावली 2006 में पार्षदों व मुखिया जी को रजिस्ट्रेशन करने का अधिकार है. इसके तहत वार्ड पार्षदों और मुखिया को अपना नाम, कार्यकाल और हस्ताक्षर के नमूने जिला अवर निबंधक को उपलब्ध कराना होता है. अपने वार्ड क्षेत्र में होनेवाले सभी विवाह का रजिस्ट्रेशन कर एक प्रति जिला निबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराना होता है. इसके अलावा विवाह रजिस्ट्रेशन नंबर, लड़का-लड़की का नाम, दोनों के उम्र, माता-पिता के नाम और पता दर्ज कराना होता है.
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