घर हो या सड़क, फैक्टरी हो या गैरेज हर जगह पानी की बर्बादी

औरंगाबाद कार्यालय : ‘रहीमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून’ पानी के महत्व को बता रहे रहिमन दास का यह दोहा भले ही सबकी जुबान पर हो, लेकिन पानी को बर्बाद होने से बचाने की संजीदगी शायद ही लोगों में दिखती है. घर हो या सड़क, फैक्ट्री हो या गैरेज करीब हर जगह पानी की […]
औरंगाबाद कार्यालय : ‘रहीमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून’ पानी के महत्व को बता रहे रहिमन दास का यह दोहा भले ही सबकी जुबान पर हो, लेकिन पानी को बर्बाद होने से बचाने की संजीदगी शायद ही लोगों में दिखती है. घर हो या सड़क, फैक्ट्री हो या गैरेज करीब हर जगह पानी की बर्बादी होते देखी जाती है. वैसे मशीनी प्रयोग की वजह से भी पानी की बर्बादी कई गुना अधिक बढ़ गयी है. औरंगाबाद में जल संकट को जानते और समझते हुए भी जिला प्रशासन ने अभी तक कोई तैयारी नहीं की है.
वैशाख के शुरू होते ही शहर में जल संकट गहराने लगा है, अभी गर्मी परवान पर भी नहीं चढ़ी है और शहर में जल संकट का गहराना लोगों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. जल के कुप्रबंधन की समस्या से प्रशासन अवगत होते हुए भी निबट नहीं रहा है. शहर के कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां जल संकट की समस्या वर्षों से चली आ रही है. रोजमर्रा की जरूरत भर भी लोगों को पानी उपलब्ध नहीं हो पाता. इन इलाकों में स्थिति ऐसी है कि जरूरत के पानी के लिए लोग आपस में झगड़ते और भिड़ते रहते हैं. चाहे वह शहर का कुरैशी मोहल्ला हो या टिकरी मोहल्ला ,मिनी बिगहा, विराटपुर हो या नावाडीह इदगाह हर जगह पानी की किल्लत अभी से शुरू हो गई है.
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