औरंगाबाद में 26 स्वास्थ्य पर्यवेक्षक निलंबित

Updated at : 09 Mar 2018 4:57 AM (IST)
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औरंगाबाद में 26 स्वास्थ्य पर्यवेक्षक निलंबित

औरंगाबाद नगर : जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थापित स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में बरती गयी अनियमितता के बाद जांच टीम की रिपोर्ट के आलोक में निदेशक प्रमुख ने जिले के 26 स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. इसकी जानकारी सिविल सर्जन को भी उपलब्ध करा दी गयी है. […]

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औरंगाबाद नगर : जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थापित स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में बरती गयी अनियमितता के बाद जांच टीम की रिपोर्ट के आलोक में निदेशक प्रमुख ने जिले के 26 स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. इसकी जानकारी सिविल सर्जन को भी उपलब्ध करा दी गयी है.

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, देव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में काम कर रही सुषमा सिन्हा, मदनपुर पीएचसी के अरविंद कुमार सिंह, हसपुरा पीएचसी के संतोष कुमार पांडेय, सदर प्रखंड के सैयद शफीक अहमद, मनोज कुमार, ओबरा पीएचसी के सुरेश प्रसाद सिंह, इस्लामुद्दीन, कुटुंबा पीएचसी के अरविंद कुमार सिंह, दाउदनगर पीएचसी के रमेश चौधरी, रफीगंज पीएचसी की जयंती कुमारी शर्मा, बारुण पीएचसी के आलोक रंजन, सुनील कुमार गुप्ता, नवीनगर पीएचसी के विनय कुमार सिंह, अनिल कुमार वर्मा, सुरेश राम के अलावा विभिन्न जगहों पर तैनात स्वास्थ्य पर्यवेक्षक बैजनाथ सिंह, शिव कुमार राम, गोपाल प्रसाद, गोपाल शरण सिंह, दिलीप कुमार सिंह, दिलीप कुमार, सुदामा प्रसाद, कामाख्या नारायण सिंह, उपेंद्र नारायण सिंह,

औरंगाबाद में 26 स्वास्थ्य…
रवींद्र प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
निदेशक प्रमुख डॉ चंद्रमोहन झा ने सात मार्च, 2018 को जारी अपने पत्र में कहा है कि बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के अधिनियम 10 (एक ) के अंतर्गत निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा. लेकिन, निर्धारित मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने पर ही जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जायेगा. जानकारी के अनुसार, 7 जून 2017 को औरंगाबाद जिले में कार्यरत स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों की नियुक्ति वैधता की जांच अपर निदेशक डाॅ अरविंद कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में की गयी थी. जांच के दौरान पाया गया था कि उक्त लोगों की नियुक्तियों में सभी प्रक्रियाओं का नियमानुसार पालन नहीं किया गया है. नियुक्ति करनेवाले पदाधिकारी स्वास्थ्य प्रशिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए सक्षम प्राधिकार नहीं थे.
जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों में गलत नियुक्ति का मामला
निदेशक प्रमुख के निर्देश पर सिविल सर्जन ने की कार्रवाई
तय मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने पर ही मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
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