शोर-शराबा तो हुआ, पर नहीं हो सका आइएमए का संगठन चुनाव

Updated at : 09 Oct 2017 10:53 AM (IST)
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शोर-शराबा तो हुआ, पर नहीं हो सका आइएमए का संगठन चुनाव

कुछ ने संगठन को बताया डेड, तो कुछ ने गिनायीं उपलब्धियां औरंगाबाद कार्यालय : आइएमए के संगठन चुनाव को लेकर रविवार को बुलायी गयी बैठक शोर-शराब के बीच संपन्न हो गयी. जूनियर डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद संगठन चुनाव की प्रक्रिया नहीं हो सकी. सीनियर, सीनियर रह रहे गये और जूनियर पीछे चले गये. […]

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कुछ ने संगठन को बताया डेड, तो कुछ ने गिनायीं उपलब्धियां
औरंगाबाद कार्यालय : आइएमए के संगठन चुनाव को लेकर रविवार को बुलायी गयी बैठक शोर-शराब के बीच संपन्न हो गयी. जूनियर डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद संगठन चुनाव की प्रक्रिया नहीं हो सकी. सीनियर, सीनियर रह रहे गये और जूनियर पीछे चले गये.
सुबह से ही जिले के तमाम डॉक्टरों के बीच चर्चा थी कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(आइएमए) का चुनाव होगा. ऑर्ब्जबर विमल कारक की उपस्थिति ने चुनाव को हवा भी दे दी थी. समय से सारे डॉक्टर आइएमए हॉल में मौजूद भी हुए, पर वही हुआ जिसकी कयास चंद लोगों ने लगा रखा था. सभी ने बैठक में अपनी-अपनी बातें सुनायी. सिस्टम और डेमोक्रेसी पर वकालत हुई.अंतत: आइएमए के प्रदेश पदाधिकारियों ने चुनाव को टाल दिया और यह कहा कि आपलोगों की बात ऊपर रखी जायेगी और वही से आगे की प्रक्रिया पर आदेश व निर्देश जारी किया जायेगा. इस दौरान काफी शोर-शराबा हुआ. हंगामे की स्थिति भी बनी.
कुछ डॉक्टरों ने हवा में हाथ लहरा कर विरोध भी जताया. वैसे जानकारी मिली है कि संभवत: दिसंबर के आखिरी हफ्ते में चुनाव कराया जा सकता है. मौके पर डाॅ नागेंद्र शर्मा, डाॅ असित रंजन, डाॅ आरएस गुप्ता, डाॅ चंद्रशेखर सिंह, डाॅ रविरंजन, डाॅ शोभा रानी, डाॅ शीला वर्मा, डाॅ मृत्युंजय कुमार, डाॅ आशुतोष कुमार, डाॅ लालसा सिंह, डाॅ अनिल कुमार, डाॅ विनय कुमार, डाॅ अशोक दूबे, डाॅ मनीष कुमार, डाॅ नवल किशोर सिंह, डाॅ मिथलेश सिंह, डाॅ मणि कुमारी, डाॅ विकास कुमार, डाॅ राजीव रंजन आदि मौजूद थे.
आइएमए की बैठक में दो फाड़ दिखे डॉक्टर : आइएमए की औरंगाबाद इकाई चुनाव के लिए बुलायी गयी बैठक में चुनाव तो नहीं हुआ,पर जिले के डॉक्टर दो फाड़ में जरूर दिखे. अधिकांश डॉक्टरों ने औरंगाबाद इकाई के पदाधिकारियों को आड़े हाथों लिया. डाॅ पियूष रंजन ने कहा कि औरंगाबाद का आइएमए डेड हो चुका है. आइएमए हॉल बनने के बाद डॉक्टरों ने सोचा था कि उसका उपयोग जनकल्याण के लिए किया जाए, पर यह किसी काम का नहीं रहा. डाॅ पुष्पेंद्र ने सिस्टम की वकालत करते हुए कहा कि आइएमए को नियम के तहत चलाया जाना चाहिए.
डाॅ अभय कुमार ने कहा कि आइएमए के जिला इकाई पॉकेट की वस्तु बन कर रह गयी. डाॅ असित रंजन सिंह ने कहा कि बिना सिस्टम का चल रहा है आइएमए. वैसे लोगों को सदस्य बनाया जाना चाहिए, जिनमें क्वालिटी हो. हर साल चुनाव होता है, लेकिन पर्दे के पीछे. डाॅ वीरेंद्र कुमार ने कहा कि इकाई का चुनाव कराना बेहद आवश्यक है. अधिकांश डॉक्टर चुनाव चाहते हैं.
लोकतंत्र का सम्मान करना सीखिये : डाॅ रामाशीष : बैठक के दौरान वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ रामाशीष सिंह ने अपने संबोधन के दौरान जूनियर डॉक्टरों को कहा कि वे लोकतंत्र का सम्मान करना सीखें. एक डॉक्टर को दलाल व गुंडा कहना यह बेहतर आचरण नहीं है. जात-पात की बात तो होनी नहीं चाहिए. मर्यादा से हट कर काम करना अच्छा नहीं है.
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