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अवैध पैथोलॉजी और नर्सिंग होम के जाल में फंस रहे मरीज

Updated at : 02 Apr 2019 7:38 AM (IST)
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अवैध पैथोलॉजी और नर्सिंग होम के जाल में फंस रहे मरीज

अरवल : जिले में इन दिनों प्रतिदिन सैकड़ों मरीज अवैध पैथोलॉजी व नर्सिंग होम के जाल में फंसकर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं. अवैध पैथोलॉजी के कारोबार में समाज के कुछ नामी-गिरामी लोग भी शामिल हैं. लिहाजा, इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है. मरीजों की जिंदगी पूरी तरह भगवान के रहमो-करम पर निर्भर […]

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अरवल : जिले में इन दिनों प्रतिदिन सैकड़ों मरीज अवैध पैथोलॉजी व नर्सिंग होम के जाल में फंसकर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं. अवैध पैथोलॉजी के कारोबार में समाज के कुछ नामी-गिरामी लोग भी शामिल हैं. लिहाजा, इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है. मरीजों की जिंदगी पूरी तरह भगवान के रहमो-करम पर निर्भर है. लोगों का आरोप है कि पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड तक के मामले में भी पूरे जिले में फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है.

आलीशान बिल्डिंग से लेकर झुग्गी-झोंपड़ी तक में डॉक्टरों और नर्सिंग होम के बोर्ड लगे हुए हैं जहां मरीजों का आर्थिक शोषण जारी है. जिला मुख्यालय ही नहीं, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी क्लिनिक और पैथोलॉजी की भरमार है. सूत्र बताते हैं कि जितने भी डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं, उनमें लगभग 30 फीसदी चिकित्सकों के पास ही वैध डिग्री प्राप्त है
. इसके अलावा अजब-गजब डिग्री भी बोर्ड पर लिखे होते हैं और विश्वविद्यालय या संस्था के भी नाम भी अजीबो-गरीब होते हैं. संबंधित विभागों को जानकारी होने के बावजूद ऐसे पैथोलॉजी के विरुद्ध न तो कभी जांच की गयी है और न ही इन पर नकेल कसने के लिए कोई कार्रवाई ही की गयी है. लिहाजा ये कहना वाजिब ही होगा कि सबों ने एक-दूसरे को मौन समर्थन दे रखा है.
केवल एमडी पैथोलॉजिस्ट या डीसीपी डिप्लोमा इन क्लिनिक पैथोलॉजी डिग्री धारक ही कोई लैब खोल सकते हैं. साथ ही पैथ लैब के कर्मचारियों के लिए भी आवश्यक योग्यता अनिवार्य है.
सूत्रों की मानें तो अधिकतर पैथोलॉजी इंटर, बीए पास लोगों द्वारा चलाया जा रहा है, जो वर्षों बाद डीएमएसटी में डिप्लोमा कर लेते हैं. वहीं इतनी योग्यता रखने वाो व्यक्ति का पैथलैब में सिर्फ सहयोगी का ही काम कर सकता है. कई पैथलैब में एमडी पैथोलाॅजिस्ट की जगह एमबीबीएस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करते हैं. इतना ही नहीं, उनका सहयोग करने के लिए साधारण टेक्नीशियन होते हैं तो कभी-कभी साक्षर भी रहते हैं.
गौरतलब है कि किसी भी पैथोलॉजिस्ट के लिए एक दिन में 20 से अधिक स्लाइड देख पाना संभव नहीं है लेकिन जिले में साधारण पैथोलॉजी के कर्मचारियों द्वारा सैकड़ों स्लाइड देखे जाते हैं. अवैध क्लिनिक के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर खानापूरी लगातार मरीजों के आर्थिक शोषण के बाद कभी-कभी प्रशासन भी हरकत में आता है, लेकिन आज तक उन संचालकों के विरुद्ध ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है.
लिहाजा, खुलेआम फिर से अवैध रूप से ऐसे क्लिनिक और जांच घर संचालित किये जा रहे हैं. विभाग द्वारा समुचित कदम नहीं उठाये जाने से मरीज आये दिन इसका शिकार हो रहे हैं. उन्हें अपनी जान देकर भी इसकी कीमत चुकानी पड़ती है. फर्जीवाड़े का खेल ऐसा है कि चिकित्सक भले ही वाराणसी, पटना और लखनऊ में कार्यरत हों, उनके नाम का बोर्ड फर्जी क्लिनिकों पर लगा रहता है ताकि जांच के दौरान क्लिनिक संचालक जवाब दे सकें.
ऐसे क्लिनिकों व नर्सिंग होम में धड़ल्ले से ऑपरेशन भी किये जाते हैं. इसकी आड़ में फर्जी चिकित्सकों का धंधा बेरोक-टोक जारी है. ऐसे क्लिनिक और नर्सिंग होम आलीशान बिल्डिंग से लेकर झुग्गी- झोंपड़ी तक में चलाये जा रहे हैं, जहां मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ आम बात है.
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