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घर की इज्जत है शौचालय

Updated at : 12 Nov 2017 6:44 AM (IST)
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घर की इज्जत है शौचालय

करपी (अरवल) : शौचालय को सही मायने में घर की इज्जत का नाम दें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. वास्तव में घर की इज्जत अपने घर में शौचालय निर्माण करने के बाद ही है. उक्त बातें अरवल जिला पदाधिकारी सतीश कुमार सिंह ने प्रखंड क्षेत्र के अंधरा चक गांव में आयोजित रात्रि चौपाल में कही. रात्रि […]

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करपी (अरवल) : शौचालय को सही मायने में घर की इज्जत का नाम दें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. वास्तव में घर की इज्जत अपने घर में शौचालय निर्माण करने के बाद ही है. उक्त बातें अरवल जिला पदाधिकारी सतीश कुमार सिंह ने प्रखंड क्षेत्र के अंधरा चक गांव में आयोजित रात्रि चौपाल में कही. रात्रि चौपाल में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि शौचालय निर्माण को जन आंदोलन के रूप में लें. वहीं अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों को जिलाधिकारी ने निर्देश किया कि टीम बनाकर घर-घर जाकर शौचालय निर्माण के लिए लोगों को जागरूक करें.

शौचालय निर्माण होने के बाद शौचालय निर्माण के लिए आवंटित राशि का भुगतान करें. डीएम ने कहा के लोगों के पास जमीन की कमी पैसों की कमी बतायी जाती है परंतु अपने अन्य जरूरत की सामान को जिस प्रकार आवश्यक समझते हुए लोगों द्वारा मुहैया करायी जाती है. उसी प्रकार शौचालय भी आवश्यक चीजों में एक हैं. अधिकारियों को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि लोगों के द्वारा इस प्रकार की शिकायत ही मिलती है कि पैसा भुगतान में काफी देरी होती है.

ऐसे में अधिकारियों को शौचालय निर्माण करने वाले लोगों को चिह्न करते हुए उन्हें जल्द से जल्द पैसे भुगतान करने की बात कही. डीएम ने बताया कि सरकार द्वारा खुले में शौच से मुक्त करने के लिए एक जन आंदोलन चलाया गया है, जिसमें आप लोगों की जरूरत है. जिलाधिकारी को अपने बीच पाकर ग्रामीण भी काफी खुश दिखाई दिये एवं जिलाधिकारी से खुलकर अपनी बातें रखी. किसी के पास जमीन की समस्या तो किसी के पास पैसों की समस्या बतायी जा रही थी. जिलाधिकारी ने सभी बातों को ध्यान पूर्वक सुनते हुए अपने पदाधिकारियों को दूर करने का आदेश दिया. उन्होंने कहा कि सभ्यता के आरंभ में मानवतावादी जंगलों में निवास करती थी लेकिन आज हमलोग गांव में निवास कर रहे हैं. गांव और शहर में शौचालय को लेकर ही अंतर है. शहरों में घर घर शौचालय हैं लेकिन गांव में नहीं है. शौचालय के अभाव में सबसे अधिक बीमारियां फैलती है हमारी आय का करीब प्रतिशत राशि इलाज और दवा में खर्च हो जाता है . जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि अब सोचने का समय नहीं है हम लोगों को तुरंत इस दिशा में लग जाना चाहिए और यह जनहित और समाज हित का कार्य है. इस पुनीत कार्य में मुखिया जी लोग भी सहयोग करें. इस मौके पर कार्यपालक दंडाधिकारी अजय कुमार, करपी प्रखंड विकास पदाधिकारी अखिलेश्वर कुमार, प्रमुख प्रतिनिधि राधेश्याम शर्मा, प्रखंड कार्यक्रम समन्वयक झलक देव पासवान, करपी थाना प्रभारी राजीव रंजन कुमार, ओपी प्रभारी अनिल कुमार, मुखिया दिनेश साव समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया.

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