एपीएचसी में डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशान
Updated at : 11 Oct 2017 3:21 AM (IST)
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मरीजों को इलाज के लिए अन्यत्र जाने की हो जाती है मजबूरी करपी (अरवल) : सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके. इन सब के बावजूद चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर ढंग से मरीजों तक नहीं पहुंचाया […]
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मरीजों को इलाज के लिए अन्यत्र जाने की हो जाती है मजबूरी
करपी (अरवल) : सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके. इन सब के बावजूद चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर ढंग से मरीजों तक नहीं पहुंचाया जा रहा है. लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो, यह सरकार की पहली जिम्मेदारी बनती है. इसके बावजूद अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पुराण अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है. यह केंद्र अपनी स्थापना के दशकों बाद भी गांव में स्थित सामुदायिक भवन में चल रहा है. इस केंद्र में चिकित्सक अरुण कुमार आर्य की प्रतिनियुक्ति भी की गयी है,
लेकिन चिकित्सक कभी -कभार ही स्वास्थ्य केंद्र पर आते हैं. कब और किस दिन आयेंगे, ग्रामीणों को पता भी नहीं चल पाता है, क्योंकि उनकी प्रतिनियुक्ति किंजर एपीएचसी में भी है. चिकित्सक के नहीं आने के कारण मरीजों को इलाज के लिए अन्यत्र जाना पड़ता है. स्वास्थ्यकर्मियों के नहीं रहने से ग्रामीणों में भी रोष व्याप्त रहता है .
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर संसाधनों की घोर कमी है. हालांकि इस अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन निर्माण की आधारशिला पूर्व मंत्री और जाने- माने राजनीतिज्ञ डाॅ रामजतन सिन्हा के सहयोग से लगभग दो दशक पूर्व बड़े तामझाम के साथ सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा ने रखी थी. ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि अब इलाज के लिए झोला छाप डाक्टरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. आधारशिला के कुछ ही दिनों के बाद भवन निर्माण का कार्य भी प्रारंभ हो गया, लेकिन ग्रामीणाें ने आपस में ही जमीन को लेकर विवाद शुरू कर दिया. ग्रामीणों ने जमीन संबंधी विवाद को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. इसके उपरांत तत्कालीन जिलाधिकारी संजय अग्रवाल ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी. आज तक भवन अर्धनिर्मित ही रह गया. साथ ही ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के गांवों के लोग भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा से वंचित रह गये.
क्या कहते हैं अधिकारी
चिकित्सकों की कमी है, जिसके कारण एक ही चिकित्सक को एक से अधिक जगहों पर प्रतिनियुक्त किया जाता है.
डाॅ वासुदेव नारायण, प्रभारी चि.प.
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