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कुव्यवस्था के बीच किया पिंडदान

Updated at : 07 Sep 2017 4:43 AM (IST)
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कुव्यवस्था के बीच किया पिंडदान

करपी (अरवल) : किंजर के पुनपुन नदी तट पर अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के वास्ते पिंडदानियों का समूह पिंडदान के लिए उमड़ पड़ा. कुव्यवस्था के बीच पिडंदानियों ने पिंडदान कर अपने पूर्वजों को मोक्ष की कामना की. बताते चलें कि सनातन धर्म में पूर्वजों के मोक्ष के लिए लोग गया में पिंडदान करते हैं. […]

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करपी (अरवल) : किंजर के पुनपुन नदी तट पर अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के वास्ते पिंडदानियों का समूह पिंडदान के लिए उमड़ पड़ा. कुव्यवस्था के बीच पिडंदानियों ने पिंडदान कर अपने पूर्वजों को मोक्ष की कामना की. बताते चलें कि सनातन धर्म में पूर्वजों के मोक्ष के लिए लोग गया में पिंडदान करते हैं. गया में पिंडदान करने से पूर्व पुनपुन नदी पर पिंडदान और तर्पण करते हैं. आश्विन माह के प्रथम पक्ष में गया में पितृपक्ष मेले की शुरुआत होती है जिसमें देश-विदेश के सनातन धर्मावलंबी अपने पूर्वज के मोक्ष के लिए पिंडदान करने आते हैं. गया पिंडदान से पहले पुनपुन नदी में स्नान कर पिंडदान करने और तर्पण करने का बड़ा महत्व है.

इसको लेकर पिंडदानी पुनपुन घाट और किंजर पुनपुन घाट के तट पर पहुंचते हैं. बुधवार को किंजर-पुनपुन घाट पर पड़ोसी राज्य हरियाणा, गुजरात और बंगाल से आये दर्जनों पिंडदानी यहां पहुंचे. इन सभी ने पूर्वजों के मोक्ष के लिए ब्राह्मणों की उपस्थिति में कर्मकांड करा कर पुनपुन नदी में पहला तर्पण किया. इसको लेकर दिन भर नदी तट पर मेला जैसा दृश्य था. हालांकि प्रशासन द्वारा पिंडदानियों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गयी है.
ऐसे में पिंडदानियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि नदी तट पर जगह की उपलब्धता रहने के कारण पिंडदानियों को ज्यादा असुविधा तो नहीं हुई. पिंड अर्पित करने के उपरांत पिंडदानियों का समूह देर शाम गया के लिए रवाना हो गया.
मालूम हो कि किंजर स्थित पुनपुन घाट पर प्रतिवर्ष पिंडदान करने के लिए भीड़ उमड़ती है. इस बात की जानकारी रहने के बावजूद स्थानीय प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों ने कोई इंतजाम नहीं किया.
घाट पर सीढ़ी का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन महिलाओं को कपड़ा बदलने के लिए रूम नहीं बनाया गया है. घाट पर पहले से शौचालय की भी व्यवस्था नहीं की गयी था, लेकिन मंगलवार को जिलाधिकारी के निर्देश के बाद शौचालय बनाने का कार्य जोर-शोर से किया जा रहा है.
क्या कहते हैं पिंडदानी
यहां की भौगोलिक स्थिति अच्छी है, लेकिन शासन-प्रशासन के द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. शौचालय एवं प्रकाश की व्यवस्था नहीं की गयी थी जिससे काफी असुविधा हुई.
रामबाबू खेतान, गुजरात
पिंडदानियों के लिए यह माकूल स्थान है. इसकी महत्ता को देखते हुए सरकार को यहां उचित व्यवस्था करनी चाहिए.
डीके बनर्जी, पश्चिम बंगाल
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