आरा: निरनपुर में पुराने पेड़ों की कटाई से मचा हड़कंप, ग्रामीणों के विरोध पर प्रशासन ने रुकवाया काम
बिहिया प्रखंड के निरनपुर गांव में ठेकेदारों द्वारा सड़क किनारे खड़े विशालकाय पेड़ों की कटाई शुरू करने पर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया. ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची प्रशासनिक टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी, जिससे नौ पुराने पेड़ कटने से बच गए.
Paryavaran Sanrakshan: बिहिया प्रखंड के निरनपुर गांव में सड़क किनारे खड़े दशकों पुराने विशालकाय पेड़ों पर ठेकेदारों की नजर पड़ने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया. गांव की पर्यावरणीय धरोहर माने जाने वाले इन पेड़ों की कटाई शुरू होने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना डायल 112 तथा वन विभाग को दी. सूचना पर प्रशासनिक टीम गांव पहुंची और पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगा दी.
एक चिलबिल का पेड़ काटकर गिराया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निरनपुर गांव में सड़क किनारे चार महुआ और छह चिलबिल के पुराने पेड़ लगे हुए हैं. आरोप है कि गांव के ही कुछ लोगों की मिलीभगत से पेड़ काटने वाले मौके पर पहुंचे और पेड़ों की कटाई शुरू कर दी. ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी मिली, तब तक एक चिलबिल का पेड़ काटकर धराशायी किया जा चुका था.
इसके बाद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए डायल 112 और वन विभाग को सूचना दी. सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और पेड़ काटने का काम रुकवा दिया. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद चार महुआ और पांच चिलबिल समेत कुल नौ पुराने पेड़ कटने से बच गये.
ग्रामीणों में भारी आक्रोश
पेड़ों की कटाई की घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे दशकों से खड़े ये पेड़ गांव की पहचान और पर्यावरणीय धरोहर हैं. इन्हें केवल लकड़ी के रूप में देखना उचित नहीं है. ग्रामीणों ने कहा कि इन पेड़ों से गांव के पर्यावरण को लाभ मिलता है और इनकी अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण को सीधा नुकसान होगा.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पेड़ों की कटाई के पीछे गांव के ही कुछ लोगों की भूमिका हो सकती है. हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी किसी की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है.
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ों की कटाई की अनुमति किसने दी और इसके पीछे कौन लोग हैं, इसकी जांच होनी चाहिए. दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए.
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि गांव में मौजूद पुराने और विशाल पेड़ों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाये जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अवैध कटाई न हो सके. प्रशासन के समय पर पहुंचने से फिलहाल नौ पुराने पेड़ों को बचा लिया गया है.
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